जीवन प्रक्रियाएँ (Life Processes) – परिचय एवं महत्व
जीवित प्राणियों को जीवित बनाए रखने के लिए अनेक आवश्यक क्रियाएँ लगातार चलती रहती हैं। इन क्रियाओं को जीवन प्रक्रियाएँ (Life Processes) कहा जाता है। भोजन प्राप्त करना, श्वसन करना, पदार्थों का परिवहन तथा अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
जीवन प्रक्रिया क्या है?
वे सभी जैविक क्रियाएँ जो किसी जीव को जीवित रखने, वृद्धि करने, ऊर्जा प्राप्त करने और सामान्य कार्यों को संचालित करने में सहायता करती हैं, जीवन प्रक्रियाएँ कहलाती हैं। यदि ये प्रक्रियाएँ रुक जाएँ तो जीव का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।
जीवन प्रक्रियाओं की आवश्यकता क्यों होती है?
हर जीव को जीवित रहने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा भोजन से प्राप्त होती है। भोजन को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाना, ऑक्सीजन उपलब्ध कराना तथा अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना जीवन प्रक्रियाओं के माध्यम से ही संभव होता है।
पोषण (Nutrition)
भोजन प्राप्त करना तथा उससे ऊर्जा एवं आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करना।
श्वसन (Respiration)
भोजन के ऑक्सीकरण द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करने की प्रक्रिया।
परिवहन (Transportation)
शरीर में पदार्थों का एक स्थान से दूसरे स्थान तक संचरण।
उत्सर्जन (Excretion)
शरीर से हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना।
जीवित एवं निर्जीव वस्तुओं में अंतर
| जीवित वस्तुएँ | निर्जीव वस्तुएँ |
|---|---|
| वृद्धि करती हैं | वृद्धि नहीं करतीं |
| श्वसन करती हैं | श्वसन नहीं करतीं |
| ऊर्जा का उपयोग करती हैं | ऊर्जा का जैविक उपयोग नहीं करतीं |
| अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालती हैं | उत्सर्जन नहीं होता |
| प्रजनन करने में सक्षम होती हैं | प्रजनन नहीं करतीं |
महत्वपूर्ण तथ्य
- जीवन प्रक्रियाएँ जीवित रहने के लिए अनिवार्य हैं।
- बहुकोशिकीय जीवों में विशेष अंग एवं अंग-तंत्र विकसित होते हैं।
- ऊर्जा प्राप्त करने और शरीर के कार्यों को बनाए रखने के लिए पोषण एवं श्वसन आवश्यक हैं।
- शरीर में पदार्थों के संचरण के लिए परिवहन तंत्र आवश्यक है।
- अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के लिए उत्सर्जन तंत्र कार्य करता है।
बहुकोशिकीय जीवों में जीवन प्रक्रियाओं का महत्व
एककोशिकीय जीवों में अधिकांश कार्य एक ही कोशिका द्वारा संपन्न हो जाते हैं, लेकिन मनुष्य जैसे बहुकोशिकीय जीवों में लाखों-करोड़ों कोशिकाएँ होती हैं। इस कारण विभिन्न कार्यों के लिए विशेष अंगों और अंग-तंत्रों की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि मानव शरीर में पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र, परिसंचरण तंत्र तथा उत्सर्जन तंत्र विकसित हुए हैं।
सारांश
जीवन प्रक्रियाएँ वे मूलभूत जैविक क्रियाएँ हैं जो किसी भी जीव को जीवित बनाए रखती हैं। पोषण, श्वसन, परिवहन तथा उत्सर्जन जीवन की चार प्रमुख प्रक्रियाएँ हैं। इनके बिना जीव का अस्तित्व संभव नहीं है। आगामी अनुभागों में हम इन सभी प्रक्रियाओं का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
पोषण (Nutrition) का परिचय
प्रत्येक जीव को जीवित रहने, वृद्धि करने, ऊर्जा प्राप्त करने तथा शरीर की मरम्मत के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। भोजन प्राप्त करने और उसका उपयोग करने की प्रक्रिया को पोषण कहा जाता है।
पोषण क्या है?
जीवों द्वारा भोजन प्राप्त करने, उसे उपयोगी रूप में परिवर्तित करने तथा उससे ऊर्जा और पोषक तत्व प्राप्त करने की प्रक्रिया को पोषण (Nutrition) कहते हैं। पोषण जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है क्योंकि इसके बिना कोई भी जीव लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकता।
हम जो भोजन ग्रहण करते हैं उससे शरीर को ऊर्जा, वृद्धि के लिए आवश्यक पदार्थ तथा कोशिकाओं की मरम्मत के लिए आवश्यक तत्व प्राप्त होते हैं।
जीवों को भोजन की आवश्यकता क्यों होती है?
- ऊर्जा प्राप्त करने के लिए
- शरीर की वृद्धि के लिए
- नई कोशिकाओं के निर्माण के लिए
- क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत के लिए
- रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने के लिए
- शरीर की सभी जीवन प्रक्रियाओं को संचालित करने के लिए
ऊर्जा का स्रोत
भोजन शरीर को कार्य करने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है।
विकास एवं वृद्धि
बच्चों एवं किशोरों में शरीर के विकास के लिए संतुलित पोषण अत्यंत आवश्यक है।
ऊतकों की मरम्मत
क्षतिग्रस्त कोशिकाओं और ऊतकों की मरम्मत भोजन से प्राप्त पोषक तत्वों द्वारा होती है।
पोषण के प्रमुख प्रकार
| पोषण का प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| स्वपोषी पोषण (Autotrophic) | जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। |
| परपोषी पोषण (Heterotrophic) | जीव भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। |
स्वपोषी पोषण (Autotrophic Nutrition)
वे जीव जो सूर्य के प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड की सहायता से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, स्वपोषी कहलाते हैं।
हरे पौधे स्वपोषी पोषण का सबसे अच्छा उदाहरण हैं। ये प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया द्वारा भोजन तैयार करते हैं।
परपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition)
वे जीव जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं, परपोषी कहलाते हैं।
मनुष्य, पशु-पक्षी, कवक तथा अधिकांश सूक्ष्मजीव परपोषी पोषण प्रदर्शित करते हैं।
उदाहरण
यदि कोई पौधा सूर्य के प्रकाश की सहायता से भोजन बनाता है तो वह स्वपोषी है। जबकि मनुष्य भोजन के लिए पौधों और जानवरों पर निर्भर रहता है, इसलिए वह परपोषी है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- पोषण सभी जीवन प्रक्रियाओं का आधार है।
- ऊर्जा प्राप्त करने का मुख्य स्रोत भोजन है।
- हरे पौधे स्वपोषी होते हैं।
- मनुष्य तथा अधिकांश जानवर परपोषी होते हैं।
- भोजन से प्राप्त ऊर्जा श्वसन द्वारा उपयोगी बनती है।
सारांश
पोषण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से जीव भोजन प्राप्त करते हैं और उससे ऊर्जा एवं आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करते हैं। जीवों में मुख्यतः दो प्रकार के पोषण पाए जाते हैं—स्वपोषी एवं परपोषी। आगे के अनुभाग में हम स्वपोषी पोषण तथा प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
स्वपोषी पोषण एवं प्रकाश संश्लेषण
हरे पौधे पृथ्वी पर ऐसे जीव हैं जो अपना भोजन स्वयं बना सकते हैं। यह कार्य प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) नामक प्रक्रिया द्वारा किया जाता है।
स्वपोषी पोषण क्या है?
जब कोई जीव सूर्य के प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और जल की सहायता से अपना भोजन स्वयं बनाता है, तो इस प्रकार के पोषण को स्वपोषी पोषण (Autotrophic Nutrition) कहते हैं।
हरे पौधे, शैवाल तथा कुछ जीवाणु स्वपोषी पोषण प्रदर्शित करते हैं। ये अन्य जीवों पर भोजन के लिए निर्भर नहीं रहते।
प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) क्या है?
प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज (भोजन) का निर्माण करते हैं तथा ऑक्सीजन को वातावरण में छोड़ते हैं।
↓
C₆H₁₂O₆ + 6O₂
प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक शर्तें
क्लोरोफिल
पत्तियों में उपस्थित हरा वर्णक जो सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है।
सूर्य का प्रकाश
प्रकाश संश्लेषण के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत।
कार्बन डाइऑक्साइड
वायुमंडल से रंध्रों (Stomata) द्वारा प्राप्त होती है।
जल
जड़ों द्वारा मिट्टी से अवशोषित किया जाता है।
प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया
- पौधे की पत्तियों में उपस्थित क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है।
- जड़ें मिट्टी से जल ग्रहण करती हैं।
- पत्तियों के रंध्र वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं।
- सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा की सहायता से जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड मिलकर ग्लूकोज बनाते हैं।
- ऑक्सीजन उप-उत्पाद (By-product) के रूप में वातावरण में मुक्त होती है।
रंध्र (Stomata) की भूमिका
पत्तियों की सतह पर सूक्ष्म छिद्र पाए जाते हैं जिन्हें रंध्र (Stomata) कहते हैं। ये गैसों के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
| कार्य | भूमिका |
|---|---|
| कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण | प्रकाश संश्लेषण के लिए CO₂ अंदर प्रवेश करती है। |
| ऑक्सीजन निष्कासन | प्रकाश संश्लेषण के बाद O₂ बाहर निकलती है। |
| वाष्पोत्सर्जन | अतिरिक्त जलवाष्प बाहर निकलती है। |
पौधों को कच्चा पदार्थ कहाँ से मिलता है?
| आवश्यक पदार्थ | स्रोत |
|---|---|
| कार्बन डाइऑक्साइड | वायुमंडल से |
| जल | मिट्टी से |
| सूर्य का प्रकाश | सूर्य से |
| क्लोरोफिल | हरी पत्तियों के क्लोरोप्लास्ट में |
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु
- प्रकाश संश्लेषण पौधों की भोजन निर्माण प्रक्रिया है।
- क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है।
- रंध्र (Stomata) गैसों के आदान-प्रदान का कार्य करते हैं।
- ऑक्सीजन प्रकाश संश्लेषण का उप-उत्पाद है।
- हरे पौधे पृथ्वी पर खाद्य श्रृंखला का आधार हैं।
सारांश
स्वपोषी पोषण वह प्रक्रिया है जिसमें जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा सूर्य के प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड से ग्लूकोज का निर्माण करते हैं। यह प्रक्रिया पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी से ऑक्सीजन और भोजन दोनों उपलब्ध होते हैं।
परपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition)
सभी जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। ऐसे जीव भोजन प्राप्त करने के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। इस प्रकार के पोषण को परपोषी पोषण कहा जाता है।
परपोषी पोषण क्या है?
जब कोई जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना पाता और भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अन्य जीवों पर निर्भर रहता है, तब उस पोषण को परपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition) कहते हैं।
मनुष्य, पशु, पक्षी, कवक तथा अधिकांश सूक्ष्मजीव परपोषी पोषण प्रदर्शित करते हैं।
परपोषी पोषण की विशेषताएँ
- जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते।
- भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं।
- ऊर्जा सीधे या परोक्ष रूप से पौधों से प्राप्त होती है।
- पाचन तंत्र की सहायता से भोजन को सरल रूप में परिवर्तित किया जाता है।
परपोषी पोषण के प्रकार
होलोजोइक पोषण
जीव भोजन को ग्रहण करते हैं, पचाते हैं, अवशोषित करते हैं तथा शेष पदार्थ बाहर निकालते हैं। मनुष्य और अधिकांश जानवर इसका उदाहरण हैं।
परजीवी पोषण
कुछ जीव अपने भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर रहते हैं तथा उनसे पोषक तत्व प्राप्त करते हैं।
मृतजीवी पोषण
मृत एवं सड़-गले कार्बनिक पदार्थों से भोजन प्राप्त करने वाले जीव मृतजीवी कहलाते हैं।
होलोजोइक पोषण की प्रक्रिया
मनुष्य तथा अधिकांश जानवरों में होलोजोइक पोषण पाया जाता है। इसमें निम्न चरण शामिल होते हैं:
| चरण | कार्य |
|---|---|
| अंतर्ग्रहण (Ingestion) | भोजन ग्रहण करना |
| पाचन (Digestion) | भोजन को सरल पदार्थों में बदलना |
| अवशोषण (Absorption) | पोषक तत्वों का रक्त में प्रवेश |
| आत्मसात (Assimilation) | कोशिकाओं द्वारा पोषक तत्वों का उपयोग |
| बहिर्गमन (Egestion) | अपचित भोजन को बाहर निकालना |
अमीबा में पोषण
अमीबा एक एककोशिकीय जीव है। यह अपने शरीर से अस्थायी उंगली जैसी संरचनाएँ बनाता है जिन्हें कूटपाद (Pseudopodia) कहा जाता है।
कूटपाद भोजन को चारों ओर से घेर लेते हैं और भोजन कोशिका के अंदर पहुँच जाता है। इसके बाद भोजन रसधानी (Food Vacuole) में पचाया जाता है।
उदाहरण
मनुष्य भोजन के लिए पौधों और पशुओं पर निर्भर रहता है। इसलिए मनुष्य परपोषी जीव है। वहीं गाय पौधों को खाकर ऊर्जा प्राप्त करती है, इसलिए वह भी परपोषी जीव है।
स्वपोषी एवं परपोषी पोषण में अंतर
| स्वपोषी पोषण | परपोषी पोषण |
|---|---|
| भोजन स्वयं बनाते हैं | भोजन स्वयं नहीं बना सकते |
| क्लोरोफिल आवश्यक होता है | क्लोरोफिल आवश्यक नहीं होता |
| CO₂ एवं जल का उपयोग करते हैं | अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं |
| हरे पौधे उदाहरण हैं | मनुष्य एवं जानवर उदाहरण हैं |
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु
- मनुष्य में होलोजोइक पोषण पाया जाता है।
- अमीबा कूटपाद द्वारा भोजन ग्रहण करता है।
- परजीवी जीव अपने पोषक तत्व मेजबान से प्राप्त करते हैं।
- कवक में मृतजीवी पोषण पाया जाता है।
- परपोषी जीव भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं।
सारांश
परपोषी पोषण वह प्रक्रिया है जिसमें जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। होलोजोइक, परजीवी तथा मृतजीवी इसके प्रमुख प्रकार हैं। मनुष्य में होलोजोइक पोषण पाया जाता है जबकि अमीबा में भोजन ग्रहण करने की विशेष प्रक्रिया देखी जाती है। अगले अनुभाग में हम मानव पाचन तंत्र का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)
भोजन को सरल एवं अवशोषण योग्य पदार्थों में बदलने वाली अंगों की प्रणाली को मानव पाचन तंत्र कहा जाता है। यह शरीर को ऊर्जा, वृद्धि एवं विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है।
पाचन तंत्र का परिचय
हम जो भोजन ग्रहण करते हैं वह सीधे शरीर की कोशिकाओं द्वारा उपयोग नहीं किया जा सकता। इसलिए भोजन को छोटे एवं सरल अणुओं में तोड़ना आवश्यक होता है। यह कार्य पाचन तंत्र द्वारा किया जाता है।
मानव पाचन तंत्र विभिन्न अंगों एवं ग्रंथियों से मिलकर बना होता है जो मिलकर भोजन का पाचन करते हैं।
मानव पाचन तंत्र के प्रमुख अंग
मुख (Mouth)
भोजन का प्रवेश द्वार। यहां भोजन चबाया जाता है तथा लार के साथ मिश्रित होता है।
ग्रासनली (Esophagus)
भोजन को मुख से आमाशय तक पहुंचाती है।
आमाशय (Stomach)
भोजन को संग्रहित करता है तथा प्रारंभिक पाचन करता है।
छोटी आंत
पाचन एवं अवशोषण का मुख्य स्थान।
बड़ी आंत
जल का पुनः अवशोषण करती है।
मलाशय एवं गुदा
अपचित पदार्थों को शरीर से बाहर निकालते हैं।
मुख (Mouth) में पाचन
पाचन की प्रक्रिया मुख से प्रारंभ होती है। दांत भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ते हैं तथा जीभ भोजन को लार के साथ मिलाने में सहायता करती है।
| संरचना | कार्य |
|---|---|
| दांत | भोजन को चबाना एवं पीसना |
| जीभ | भोजन को मिलाना एवं निगलने में सहायता |
| लार ग्रंथियां | लार का स्राव |
लार (Saliva) की भूमिका
लार में एक महत्वपूर्ण एंजाइम Salivary Amylase पाया जाता है। यह स्टार्च (जटिल कार्बोहाइड्रेट) को माल्टोज जैसी सरल शर्करा में बदलना प्रारंभ करता है।
यही कारण है कि भोजन को अच्छी तरह चबाने की सलाह दी जाती है।
आमाशय (Stomach) में पाचन
भोजन ग्रासनली से होकर आमाशय में पहुंचता है। यहां भोजन गैस्ट्रिक रस (Gastric Juice) के संपर्क में आता है।
| घटक | कार्य |
|---|---|
| हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) | भोजन को अम्लीय बनाता है तथा जीवाणुओं को नष्ट करता है |
| पेप्सिन (Pepsin) | प्रोटीन का पाचन करता है |
| म्यूकस (Mucus) | आमाशय की भीतरी दीवार की सुरक्षा करता है |
HCl का महत्व
आमाशय में उपस्थित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल दो प्रमुख कार्य करता है:
- हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है।
- पेप्सिन एंजाइम को सक्रिय करने हेतु अम्लीय माध्यम प्रदान करता है।
छोटी आंत की भूमिका
छोटी आंत पाचन तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। यहां भोजन का अधिकांश पाचन तथा अवशोषण होता है।
यकृत (Liver), अग्न्याशय (Pancreas) एवं छोटी आंत के रस मिलकर भोजन को पूर्ण रूप से पचाते हैं।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु
- पाचन की प्रक्रिया मुख से शुरू होती है।
- Salivary Amylase स्टार्च का पाचन करता है।
- HCl आमाशय में अम्लीय माध्यम प्रदान करता है।
- Pepsin प्रोटीन का पाचन करता है।
- छोटी आंत पाचन एवं अवशोषण का मुख्य स्थान है।
सारांश
मानव पाचन तंत्र भोजन को सरल एवं अवशोषण योग्य पदार्थों में बदलने का कार्य करता है। मुख में लार द्वारा कार्बोहाइड्रेट का प्रारंभिक पाचन शुरू होता है जबकि आमाशय में प्रोटीन का पाचन प्रारंभ होता है। छोटी आंत में भोजन का अधिकांश पाचन एवं अवशोषण पूरा होता है। अगले अनुभाग में हम भोजन के पाचन एवं अवशोषण की विस्तृत प्रक्रिया का अध्ययन करेंगे।
भोजन का पाचन एवं अवशोषण
पाचन के दौरान जटिल भोजन को सरल पदार्थों में बदला जाता है ताकि शरीर उन्हें आसानी से अवशोषित कर सके। छोटी आंत में भोजन का अधिकांश पाचन तथा अवशोषण पूरा होता है।
पाचन की संपूर्ण प्रक्रिया
भोजन मुख से प्रारंभ होकर आमाशय तथा छोटी आंत तक पहुंचता है। विभिन्न एंजाइम, पाचक रस एवं सहायक अंग भोजन को छोटे-छोटे अणुओं में बदलते हैं।
कार्बोहाइड्रेट का पाचन
कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा का प्रमुख स्रोत हैं। इनका पाचन मुख में प्रारंभ होता है।
| स्थान | एंजाइम | कार्य |
|---|---|---|
| मुख | Salivary Amylase | स्टार्च को माल्टोज में बदलता है |
| छोटी आंत | विभिन्न एंजाइम | सरल शर्करा में परिवर्तन |
प्रोटीन का पाचन
प्रोटीन शरीर की वृद्धि एवं ऊतकों की मरम्मत के लिए आवश्यक होते हैं। इनका पाचन मुख्य रूप से आमाशय में प्रारंभ होता है।
| स्थान | एंजाइम | कार्य |
|---|---|---|
| आमाशय | Pepsin | प्रोटीन को छोटे पेप्टाइड्स में बदलता है |
| छोटी आंत | Trypsin आदि | अमीनो अम्लों में परिवर्तन |
वसा (Fats) का पाचन
वसा का पाचन सबसे जटिल प्रक्रिया मानी जाती है। इसके लिए यकृत, अग्न्याशय और छोटी आंत तीनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
वसा पाचन की चरणबद्ध प्रक्रिया
चरण 2: पित्त रस वसा के बड़े-बड़े कणों को छोटे-छोटे कणों में तोड़ता है। इस प्रक्रिया को इमल्सीकरण (Emulsification) कहते हैं।
चरण 3: अग्न्याशय (Pancreas) से निकलने वाला Lipase एंजाइम वसा पर कार्य करता है।
चरण 4: वसा का अंतिम पाचन होकर यह Fatty Acids एवं Glycerol में बदल जाती है।
यकृत (Liver)
पित्त रस का निर्माण करता है तथा वसा के इमल्सीकरण में सहायता करता है।
अग्न्याशय (Pancreas)
Lipase सहित कई महत्वपूर्ण पाचक एंजाइम प्रदान करता है।
छोटी आंत
वसा का अंतिम पाचन एवं अवशोषण यहीं पर होता है।
अवशोषण (Absorption) क्या है?
पाचन के बाद भोजन के सरल अणु छोटी आंत की दीवारों द्वारा रक्त में पहुंचाए जाते हैं। इस प्रक्रिया को अवशोषण कहते हैं।
विल्ली (Villi) की भूमिका
छोटी आंत की आंतरिक सतह पर उंगली जैसी असंख्य संरचनाएं पाई जाती हैं जिन्हें विल्ली (Villi) कहते हैं।
| विशेषता | लाभ |
|---|---|
| उंगली जैसी संरचना | सतह क्षेत्र बढ़ाती है |
| अधिक रक्त वाहिकाएं | पोषक तत्वों का शीघ्र अवशोषण |
| विशाल अवशोषण क्षेत्र | अधिकतम पोषक तत्व ग्रहण |
अवशोषित भोजन का क्या होता है?
विल्ली द्वारा अवशोषित पोषक तत्व रक्त में प्रवेश करते हैं। रक्त इन्हें शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुंचाता है जहां उनका उपयोग ऊर्जा उत्पादन, वृद्धि एवं ऊतकों की मरम्मत में किया जाता है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु
- वसा का पाचन मुख्यतः छोटी आंत में होता है।
- Bile Juice वसा का इमल्सीकरण करता है।
- Lipase वसा को Fatty Acids एवं Glycerol में बदलता है।
- छोटी आंत में पाचन एवं अवशोषण दोनों होते हैं।
- Villi अवशोषण क्षेत्र को बढ़ाती हैं।
- पोषक तत्व रक्त के माध्यम से शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचते हैं।
सारांश
कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं वसा का पाचन विभिन्न एंजाइमों की सहायता से होता है। वसा के पाचन में यकृत, अग्न्याशय और छोटी आंत की विशेष भूमिका होती है। छोटी आंत की विल्ली भोजन के अवशोषण को अत्यंत प्रभावी बनाती हैं। अगले अनुभाग में हम श्वसन एवं ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया का अध्ययन करेंगे।
श्वसन (Respiration) एवं ऊर्जा उत्पादन
श्वसन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव भोजन से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। यह ऊर्जा शरीर की सभी जीवन प्रक्रियाओं को संचालित करने के लिए आवश्यक होती है।
श्वसन क्या है?
जीवित कोशिकाओं में भोजन के ऑक्सीकरण द्वारा ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को श्वसन (Respiration) कहते हैं। इस प्रक्रिया में भोजन धीरे-धीरे टूटता है और ऊर्जा ATP के रूप में संग्रहित होती है।
श्वसन केवल सांस लेने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि कोशिकाओं के भीतर होने वाली ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया है।
श्वसन का महत्व
- शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
- वृद्धि एवं विकास में सहायता करता है।
- कोशिकीय क्रियाओं को संचालित करता है।
- मांसपेशियों को कार्य करने योग्य बनाता है।
- जीवन प्रक्रियाओं को बनाए रखता है।
ग्लूकोज का विघटन
श्वसन की शुरुआत ग्लूकोज के टूटने से होती है। ग्लूकोज एक छह-कार्बन यौगिक है। सबसे पहले यह टूटकर पायरुवेट (Pyruvate) बनाता है।
↓
2 पायरुवेट (3 Carbon + 3 Carbon)
पायरुवेट का महत्व
पायरुवेट श्वसन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण मध्यवर्ती उत्पाद है। इसके बाद यह विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार आगे टूटकर ऊर्जा उत्पन्न करता है।
| स्थिति | उत्पाद |
|---|---|
| ऑक्सीजन की उपस्थिति | CO₂ + H₂O + अधिक ऊर्जा |
| ऑक्सीजन की कमी | अन्य उत्पाद + कम ऊर्जा |
ATP क्या है?
ATP (Adenosine Triphosphate) कोशिका की ऊर्जा मुद्रा (Energy Currency) कहलाती है। श्वसन द्वारा प्राप्त ऊर्जा ATP में संग्रहित रहती है।
जब कोशिकाओं को ऊर्जा की आवश्यकता होती है तब ATP टूटकर ऊर्जा प्रदान करता है।
ऊर्जा उत्पादन
ATP शरीर की सभी गतिविधियों के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराता है।
मांसपेशियों का कार्य
चलना, दौड़ना, कूदना जैसी गतिविधियों में ATP की आवश्यकता होती है।
कोशिकीय कार्य
नई कोशिकाओं का निर्माण एवं मरम्मत ATP की सहायता से होती है।
श्वसन एवं दहन में अंतर
| श्वसन | दहन |
|---|---|
| कोशिकाओं के अंदर होता है | बाहरी वातावरण में होता है |
| धीमी प्रक्रिया | तेज प्रक्रिया |
| ऊर्जा नियंत्रित रूप से निकलती है | ऊर्जा अचानक निकलती है |
| जीवित कोशिकाओं में होता है | जीवित कोशिकाओं की आवश्यकता नहीं |
कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration)
श्वसन की वास्तविक प्रक्रिया कोशिकाओं के अंदर होती है। भोजन से प्राप्त ग्लूकोज कोशिकाओं में पहुंचकर टूटता है और ATP का निर्माण करता है।
यही ATP शरीर की सभी जैविक गतिविधियों के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु
- श्वसन का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा प्राप्त करना है।
- ग्लूकोज श्वसन का प्रमुख ईंधन है।
- पायरुवेट श्वसन का मध्यवर्ती उत्पाद है।
- ATP को ऊर्जा मुद्रा कहा जाता है।
- श्वसन एवं सांस लेना अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं।
- श्वसन कोशिकाओं के भीतर होता है।
सारांश
श्वसन भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें ग्लूकोज पहले पायरुवेट में बदलता है और बाद में ऊर्जा उत्पन्न होती है। ATP इस ऊर्जा को संग्रहित करके शरीर की सभी गतिविधियों को संचालित करता है। अगले अनुभाग में हम एरोबिक एवं एनएरोबिक श्वसन का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
एरोबिक एवं एनएरोबिक श्वसन
सभी जीव ऊर्जा प्राप्त करने के लिए श्वसन करते हैं। ऑक्सीजन की उपलब्धता के आधार पर श्वसन दो प्रकार का होता है—एरोबिक श्वसन और एनएरोबिक श्वसन।
एरोबिक श्वसन (Aerobic Respiration)
जब श्वसन प्रक्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में होती है, तब उसे एरोबिक श्वसन कहा जाता है। इस प्रक्रिया में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है और अधिक मात्रा में ऊर्जा प्राप्त होती है।
मनुष्य, अधिकांश जानवर तथा पौधे सामान्य परिस्थितियों में एरोबिक श्वसन करते हैं।
एनएरोबिक श्वसन (Anaerobic Respiration)
जब श्वसन प्रक्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति या कमी में होती है, तो उसे एनएरोबिक श्वसन कहा जाता है।
इस प्रक्रिया में ग्लूकोज का पूर्ण विघटन नहीं होता, इसलिए कम ऊर्जा प्राप्त होती है।
माइटोकॉन्ड्रिया की भूमिका
माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का "Power House of the Cell" कहा जाता है। एरोबिक श्वसन का मुख्य भाग माइटोकॉन्ड्रिया में होता है जहां ATP का निर्माण होता है।
अधिक ऊर्जा
एरोबिक श्वसन में ऊर्जा उत्पादन अधिक होता है।
कम ऊर्जा
एनएरोबिक श्वसन में ऊर्जा उत्पादन अपेक्षाकृत कम होता है।
ऑक्सीजन की भूमिका
एरोबिक श्वसन के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है जबकि एनएरोबिक में नहीं।
एरोबिक एवं एनएरोबिक श्वसन में अंतर
| एरोबिक श्वसन | एनएरोबिक श्वसन |
|---|---|
| ऑक्सीजन आवश्यक | ऑक्सीजन आवश्यक नहीं |
| अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है | कम ऊर्जा उत्पन्न होती है |
| ग्लूकोज का पूर्ण विघटन | ग्लूकोज का अपूर्ण विघटन |
| CO₂ एवं H₂O बनते हैं | अल्कोहल या लैक्टिक अम्ल बनता है |
| माइटोकॉन्ड्रिया में होता है | मुख्यतः कोशिकाद्रव्य में होता है |
यीस्ट में एनएरोबिक श्वसन
यीस्ट एक सूक्ष्म जीव है जो ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में श्वसन करता है। इस प्रक्रिया में ग्लूकोज से एथिल अल्कोहल, कार्बन डाइऑक्साइड और ऊर्जा बनती है।
मानव मांसपेशियों में एनएरोबिक श्वसन
जब हम बहुत तेज दौड़ते हैं या भारी व्यायाम करते हैं, तब मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में मांसपेशियां एनएरोबिक श्वसन करती हैं।
लैक्टिक अम्ल के जमा होने से मांसपेशियों में दर्द और थकान महसूस होती है।
ऊर्जा उत्पादन की तुलना
| श्वसन का प्रकार | ऊर्जा उत्पादन |
|---|---|
| एरोबिक श्वसन | बहुत अधिक ATP |
| एनएरोबिक श्वसन | कम ATP |
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु
- एरोबिक श्वसन में ऑक्सीजन आवश्यक होती है।
- माइटोकॉन्ड्रिया को Power House of Cell कहा जाता है।
- यीस्ट में एनएरोबिक श्वसन होता है।
- मांसपेशियों में लैक्टिक अम्ल बनने से थकान होती है।
- एरोबिक श्वसन अधिक ऊर्जा प्रदान करता है।
- एनएरोबिक श्वसन में ग्लूकोज का अपूर्ण विघटन होता है।
सारांश
ऑक्सीजन की उपलब्धता के आधार पर श्वसन दो प्रकार का होता है—एरोबिक एवं एनएरोबिक। एरोबिक श्वसन में अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है जबकि एनएरोबिक श्वसन में कम ऊर्जा उत्पन्न होती है। यीस्ट और मांसपेशियों में एनएरोबिक श्वसन के विशेष उदाहरण देखने को मिलते हैं। अगले अनुभाग में हम मानव श्वसन तंत्र का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
एरोबिक एवं एनएरोबिक श्वसन
सभी जीव ऊर्जा प्राप्त करने के लिए श्वसन करते हैं। ऑक्सीजन की उपलब्धता के आधार पर श्वसन दो प्रकार का होता है—एरोबिक श्वसन और एनएरोबिक श्वसन।
एरोबिक श्वसन (Aerobic Respiration)
जब श्वसन प्रक्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में होती है, तब उसे एरोबिक श्वसन कहा जाता है। इस प्रक्रिया में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है और अधिक मात्रा में ऊर्जा प्राप्त होती है।
मनुष्य, अधिकांश जानवर तथा पौधे सामान्य परिस्थितियों में एरोबिक श्वसन करते हैं।
एनएरोबिक श्वसन (Anaerobic Respiration)
जब श्वसन प्रक्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति या कमी में होती है, तो उसे एनएरोबिक श्वसन कहा जाता है।
इस प्रक्रिया में ग्लूकोज का पूर्ण विघटन नहीं होता, इसलिए कम ऊर्जा प्राप्त होती है।
माइटोकॉन्ड्रिया की भूमिका
माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का "Power House of the Cell" कहा जाता है। एरोबिक श्वसन का मुख्य भाग माइटोकॉन्ड्रिया में होता है जहां ATP का निर्माण होता है।
अधिक ऊर्जा
एरोबिक श्वसन में ऊर्जा उत्पादन अधिक होता है।
कम ऊर्जा
एनएरोबिक श्वसन में ऊर्जा उत्पादन अपेक्षाकृत कम होता है।
ऑक्सीजन की भूमिका
एरोबिक श्वसन के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है जबकि एनएरोबिक में नहीं।
एरोबिक एवं एनएरोबिक श्वसन में अंतर
| एरोबिक श्वसन | एनएरोबिक श्वसन |
|---|---|
| ऑक्सीजन आवश्यक | ऑक्सीजन आवश्यक नहीं |
| अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है | कम ऊर्जा उत्पन्न होती है |
| ग्लूकोज का पूर्ण विघटन | ग्लूकोज का अपूर्ण विघटन |
| CO₂ एवं H₂O बनते हैं | अल्कोहल या लैक्टिक अम्ल बनता है |
| माइटोकॉन्ड्रिया में होता है | मुख्यतः कोशिकाद्रव्य में होता है |
यीस्ट में एनएरोबिक श्वसन
यीस्ट एक सूक्ष्म जीव है जो ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में श्वसन करता है। इस प्रक्रिया में ग्लूकोज से एथिल अल्कोहल, कार्बन डाइऑक्साइड और ऊर्जा बनती है।
मानव मांसपेशियों में एनएरोबिक श्वसन
जब हम बहुत तेज दौड़ते हैं या भारी व्यायाम करते हैं, तब मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में मांसपेशियां एनएरोबिक श्वसन करती हैं।
लैक्टिक अम्ल के जमा होने से मांसपेशियों में दर्द और थकान महसूस होती है।
ऊर्जा उत्पादन की तुलना
| श्वसन का प्रकार | ऊर्जा उत्पादन |
|---|---|
| एरोबिक श्वसन | बहुत अधिक ATP |
| एनएरोबिक श्वसन | कम ATP |
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु
- एरोबिक श्वसन में ऑक्सीजन आवश्यक होती है।
- माइटोकॉन्ड्रिया को Power House of Cell कहा जाता है।
- यीस्ट में एनएरोबिक श्वसन होता है।
- मांसपेशियों में लैक्टिक अम्ल बनने से थकान होती है।
- एरोबिक श्वसन अधिक ऊर्जा प्रदान करता है।
- एनएरोबिक श्वसन में ग्लूकोज का अपूर्ण विघटन होता है।
सारांश
ऑक्सीजन की उपलब्धता के आधार पर श्वसन दो प्रकार का होता है—एरोबिक एवं एनएरोबिक। एरोबिक श्वसन में अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है जबकि एनएरोबिक श्वसन में कम ऊर्जा उत्पन्न होती है। यीस्ट और मांसपेशियों में एनएरोबिक श्वसन के विशेष उदाहरण देखने को मिलते हैं। अगले अनुभाग में हम मानव श्वसन तंत्र का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
मानव श्वसन तंत्र (Human Respiratory System)
मानव शरीर को जीवित रहने के लिए निरंतर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। श्वसन तंत्र शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने तथा कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने का कार्य करता है।
श्वसन तंत्र का परिचय
मानव श्वसन तंत्र कई अंगों से मिलकर बना होता है जो वातावरण से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और शरीर द्वारा उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालते हैं।
यह प्रक्रिया गैसों के आदान-प्रदान (Exchange of Gases) के माध्यम से होती है।
मानव श्वसन तंत्र के प्रमुख अंग
नासिका (Nostrils)
वायु शरीर में प्रवेश करती है तथा धूल और अशुद्धियों को छाना जाता है।
नासिका गुहा (Nasal Cavity)
वायु को गर्म और नम बनाती है।
श्वासनली (Trachea)
वायु को फेफड़ों तक पहुंचाती है।
ब्रांकाई (Bronchi)
श्वासनली की दो शाखाएँ जो फेफड़ों में प्रवेश करती हैं।
ब्रांकियोल्स (Bronchioles)
ब्रांकाई की छोटी शाखाएँ।
एल्वियोली (Alveoli)
गैसों के आदान-प्रदान का वास्तविक स्थान।
वायु का मार्ग
श्वसन के दौरान वायु इसी मार्ग से होकर फेफड़ों तक पहुंचती है।
एल्वियोली (Alveoli) की संरचना एवं कार्य
एल्वियोली फेफड़ों में उपस्थित सूक्ष्म वायु थैलियाँ होती हैं। इनकी दीवारें बहुत पतली होती हैं तथा इनके चारों ओर रक्त केशिकाओं का जाल होता है।
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पतली दीवार | गैसों का तीव्र आदान-प्रदान |
| विशाल सतह क्षेत्र | अधिक ऑक्सीजन अवशोषण |
| रक्त केशिकाओं की अधिकता | ऑक्सीजन का शीघ्र परिवहन |
गैसों का आदान-प्रदान
एल्वियोली में ऑक्सीजन वायु से रक्त में प्रवेश करती है जबकि कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से एल्वियोली में प्रवेश करके बाहर निकल जाती है।
कार्बन डाइऑक्साइड : रक्त → एल्वियोली → वातावरण
बहुकोशिकीय जीवों में डिफ्यूजन पर्याप्त क्यों नहीं है?
एककोशिकीय जीवों में डिफ्यूजन द्वारा ऑक्सीजन आसानी से कोशिका तक पहुंच जाती है। लेकिन मनुष्य जैसे बहुकोशिकीय जीवों में करोड़ों कोशिकाएँ होती हैं जो शरीर के अंदर गहराई में स्थित रहती हैं।
इसलिए केवल डिफ्यूजन द्वारा सभी कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुंचाना संभव नहीं होता। इसी कारण विशेष श्वसन तंत्र एवं परिसंचरण तंत्र की आवश्यकता होती है।
श्वसन दर को प्रभावित करने वाले कारक
| कारक | प्रभाव |
|---|---|
| व्यायाम | श्वसन दर बढ़ जाती है |
| दौड़ना | ऑक्सीजन की मांग बढ़ती है |
| आराम की अवस्था | श्वसन दर सामान्य रहती है |
| ऊँचाई वाले क्षेत्र | ऑक्सीजन कम होने से श्वसन बढ़ता है |
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु
- एल्वियोली गैसों के आदान-प्रदान का मुख्य स्थान हैं।
- श्वासनली में उपास्थि के छल्ले (Cartilage Rings) होते हैं।
- ऑक्सीजन रक्त में प्रवेश करती है तथा कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है।
- बहुकोशिकीय जीवों में डिफ्यूजन पर्याप्त नहीं होता।
- फेफड़े श्वसन तंत्र के मुख्य अंग हैं।
- एल्वियोली का सतह क्षेत्र बहुत अधिक होता है।
सारांश
मानव श्वसन तंत्र शरीर को ऑक्सीजन प्रदान करने और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने का कार्य करता है। एल्वियोली गैसों के आदान-प्रदान का मुख्य स्थान हैं। बहुकोशिकीय जीवों में केवल डिफ्यूजन पर्याप्त नहीं होता, इसलिए विशेष श्वसन अंगों की आवश्यकता होती है। अगले अनुभाग में हम परिवहन तंत्र (Transportation System) का अध्ययन करेंगे।
परिवहन तंत्र (Transportation in Humans and Plants)
शरीर की प्रत्येक कोशिका तक भोजन, ऑक्सीजन, हार्मोन तथा अन्य आवश्यक पदार्थों को पहुँचाने के लिए परिवहन तंत्र आवश्यक होता है। इसी प्रकार पौधों में भी जल और भोजन के परिवहन के लिए विशेष ऊतक पाए जाते हैं।
परिवहन की आवश्यकता
बहुकोशिकीय जीवों में सभी कोशिकाएँ बाहरी वातावरण के सीधे संपर्क में नहीं होतीं। इसलिए भोजन, ऑक्सीजन तथा अन्य पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने के लिए परिवहन तंत्र आवश्यक है।
मानव परिसंचरण तंत्र (Human Circulatory System)
मानव शरीर में परिवहन का कार्य परिसंचरण तंत्र द्वारा किया जाता है। इस तंत्र के मुख्य भाग हैं — रक्त, रक्त वाहिकाएँ तथा हृदय।
रक्त (Blood)
रक्त एक तरल संयोजी ऊतक (Fluid Connective Tissue) है जो शरीर में विभिन्न पदार्थों का परिवहन करता है।
| घटक | कार्य |
|---|---|
| प्लाज्मा | पोषक तत्व, हार्मोन एवं अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन |
| RBC (लाल रक्त कणिकाएँ) | ऑक्सीजन का परिवहन |
| WBC (श्वेत रक्त कणिकाएँ) | रोगों से रक्षा |
| प्लेटलेट्स | रक्त का थक्का बनाना |
हृदय (Heart)
हृदय एक पेशीय अंग है जो रक्त को पूरे शरीर में पंप करता है। मनुष्य का हृदय चार कक्षों (Four Chambers) से मिलकर बना होता है।
| कक्ष | कार्य |
|---|---|
| दायाँ आलिंद (Right Atrium) | शरीर से अशुद्ध रक्त प्राप्त करता है |
| दायाँ निलय (Right Ventricle) | रक्त को फेफड़ों तक भेजता है |
| बायाँ आलिंद (Left Atrium) | फेफड़ों से शुद्ध रक्त प्राप्त करता है |
| बायाँ निलय (Left Ventricle) | शुद्ध रक्त पूरे शरीर में भेजता है |
दोहरा परिसंचरण (Double Circulation)
मानव शरीर में रक्त एक पूर्ण चक्र के दौरान हृदय से दो बार गुजरता है। इसे दोहरा परिसंचरण कहा जाता है।
यह प्रक्रिया ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त को अलग बनाए रखती है।
धमनियाँ एवं शिराएँ
| धमनियाँ (Arteries) | शिराएँ (Veins) |
|---|---|
| रक्त को हृदय से बाहर ले जाती हैं | रक्त को हृदय तक वापस लाती हैं |
| दीवारें मोटी होती हैं | दीवारें पतली होती हैं |
| वाल्व नहीं होते | वाल्व उपस्थित होते हैं |
| अधिकतर शुद्ध रक्त ले जाती हैं | अधिकतर अशुद्ध रक्त लाती हैं |
लसीका (Lymph)
लसीका एक रंगहीन द्रव है जो ऊतकों से अतिरिक्त द्रव को वापस रक्त में पहुँचाने का कार्य करता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पौधों में परिवहन
पौधों में परिवहन के लिए दो विशेष ऊतक पाए जाते हैं — जाइलम एवं फ्लोएम।
जाइलम (Xylem)
जड़ों से जल एवं खनिज पदार्थों को पत्तियों तक पहुँचाता है।
फ्लोएम (Phloem)
पत्तियों में बने भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है।
जाइलम एवं फ्लोएम में अंतर
| जाइलम | फ्लोएम |
|---|---|
| जल एवं खनिजों का परिवहन | भोजन का परिवहन |
| जड़ों से ऊपर की ओर परिवहन | दोनों दिशाओं में परिवहन |
| मुख्यतः मृत कोशिकाएँ | मुख्यतः जीवित कोशिकाएँ |
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु
- RBC ऑक्सीजन का परिवहन करती हैं।
- WBC शरीर को रोगों से बचाती हैं।
- मानव हृदय में चार कक्ष होते हैं।
- मनुष्य में दोहरा परिसंचरण पाया जाता है।
- जाइलम जल एवं खनिजों का परिवहन करता है।
- फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है।
सारांश
मानव शरीर में रक्त, हृदय एवं रक्त वाहिकाएँ मिलकर परिवहन तंत्र बनाते हैं। यह तंत्र शरीर की प्रत्येक कोशिका तक आवश्यक पदार्थ पहुँचाता है। पौधों में जाइलम एवं फ्लोएम जल, खनिज तथा भोजन के परिवहन का कार्य करते हैं। अगले अनुभाग में हम उत्सर्जन तंत्र (Excretory System) का अध्ययन करेंगे।
उत्सर्जन (Excretion) एवं मानव उत्सर्जन तंत्र
शरीर में होने वाली विभिन्न उपापचयी (Metabolic) क्रियाओं के परिणामस्वरूप अनेक अपशिष्ट पदार्थ बनते हैं। इन हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।
उत्सर्जन क्या है?
जीवों के शरीर में विभिन्न जैव-रासायनिक क्रियाओं के दौरान अपशिष्ट पदार्थ उत्पन्न होते हैं। यदि इन्हें शरीर से बाहर न निकाला जाए तो ये शरीर को हानि पहुँचा सकते हैं। इन अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्सर्जन कहलाती है।
उत्सर्जन का महत्व
- शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है।
- रक्त की शुद्धता बनाए रखता है।
- जल एवं लवण संतुलन बनाए रखता है।
- शरीर के आंतरिक वातावरण को स्थिर रखता है।
- जीवन प्रक्रियाओं के सुचारु संचालन में सहायता करता है।
मानव उत्सर्जन तंत्र के प्रमुख अंग
वृक्क (Kidneys)
रक्त को छानकर अपशिष्ट पदार्थों को अलग करते हैं।
मूत्रवाहिनी (Ureter)
मूत्र को वृक्क से मूत्राशय तक पहुंचाती है।
मूत्राशय (Urinary Bladder)
मूत्र को अस्थायी रूप से संग्रहित करता है।
मूत्रमार्ग (Urethra)
मूत्र को शरीर से बाहर निकालता है।
मानव उत्सर्जन तंत्र का प्रवाह
वृक्क (Kidney) का कार्य
वृक्क मानव शरीर का मुख्य उत्सर्जन अंग है। प्रत्येक मनुष्य में दो वृक्क होते हैं जो रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित रहते हैं।
इनका मुख्य कार्य रक्त को छानना तथा यूरिया, अतिरिक्त जल एवं लवणों को अलग करना है।
नेफ्रॉन (Nephron) – वृक्क की कार्यात्मक इकाई
वृक्क की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई को नेफ्रॉन कहा जाता है। प्रत्येक वृक्क में लाखों नेफ्रॉन उपस्थित होते हैं।
| भाग | कार्य |
|---|---|
| ग्लोमेरुलस | रक्त का प्रारंभिक निस्यंदन (Filtration) |
| बोमैन कैप्सूल | निस्यंदित द्रव को संग्रहित करना |
| नलिकाएँ | उपयोगी पदार्थों का पुनः अवशोषण |
| संग्रह नलिका | मूत्र का संग्रह |
मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
मूत्र निर्माण तीन प्रमुख चरणों में होता है:
| चरण | कार्य |
|---|---|
| निस्यंदन (Filtration) | रक्त से अपशिष्ट पदार्थों का पृथक्करण |
| पुनः अवशोषण (Reabsorption) | उपयोगी पदार्थों को पुनः रक्त में भेजना |
| स्रवण (Secretion) | अतिरिक्त अपशिष्ट पदार्थों को मूत्र में मिलाना |
डायलिसिस (Dialysis)
यदि किसी व्यक्ति के वृक्क सही प्रकार से कार्य नहीं करते, तो कृत्रिम रूप से रक्त को शुद्ध करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसे डायलिसिस कहते हैं।
यह प्रक्रिया जीवन रक्षक तकनीक के रूप में उपयोग की जाती है।
पौधों में उत्सर्जन
पौधों में कोई विशेष उत्सर्जन तंत्र नहीं होता। वे अपशिष्ट पदार्थों को विभिन्न तरीकों से बाहर निकालते हैं।
- रंध्रों द्वारा गैसों का निष्कासन
- पुरानी पत्तियों के गिरने द्वारा अपशिष्ट निष्कासन
- गोंद, राल एवं लेटेक्स के रूप में अपशिष्ट संग्रह
- वाष्पोत्सर्जन द्वारा अतिरिक्त जल का निष्कासन
महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु
- किडनी उत्सर्जन तंत्र का मुख्य अंग है।
- नेफ्रॉन किडनी की कार्यात्मक इकाई है।
- मूत्र निर्माण में निस्यंदन, पुनः अवशोषण एवं स्रवण शामिल हैं।
- यूरिया मुख्य नाइट्रोजनी अपशिष्ट पदार्थ है।
- डायलिसिस किडनी की विफलता की स्थिति में उपयोग किया जाता है।
- पौधों में कोई विशेष उत्सर्जन तंत्र नहीं होता।
सारांश
उत्सर्जन शरीर से हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया है। मानव शरीर में किडनी, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग मिलकर उत्सर्जन तंत्र बनाते हैं। नेफ्रॉन रक्त को छानकर मूत्र का निर्माण करता है। पौधे भी विभिन्न प्राकृतिक तरीकों से अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन करते हैं। अगले अनुभाग में पूरे अध्याय का निष्कर्ष, मुख्य बिंदु, परीक्षा पुनरावृत्ति एवं महत्वपूर्ण FAQs शामिल होंगे।
निष्कर्ष, मुख्य बिंदु एवं FAQs
इस अध्याय में हमने जीवन प्रक्रियाओं, पोषण, श्वसन, परिवहन तथा उत्सर्जन जैसी महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं का अध्ययन किया। ये सभी प्रक्रियाएँ जीवित रहने के लिए अनिवार्य हैं।
अध्याय का निष्कर्ष (Conclusion)
जीवन प्रक्रियाएँ वे सभी जैविक क्रियाएँ हैं जो किसी जीव को जीवित बनाए रखती हैं। पोषण ऊर्जा प्रदान करता है, श्वसन उस ऊर्जा को उपयोगी बनाता है, परिवहन तंत्र पदार्थों को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है और उत्सर्जन तंत्र अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है।
इन चारों प्रक्रियाओं का समन्वय ही जीवन को संभव बनाता है।
Key Takeaways (मुख्य सीख)
- जीवन प्रक्रियाएँ जीवित रहने के लिए आवश्यक हैं।
- हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
- मनुष्य परपोषी पोषण प्रदर्शित करता है।
- Salivary Amylase स्टार्च का पाचन प्रारंभ करता है।
- HCl आमाशय में अम्लीय माध्यम प्रदान करता है।
- छोटी आंत में भोजन का अधिकांश पाचन एवं अवशोषण होता है।
- ATP कोशिका की ऊर्जा मुद्रा कहलाती है।
- माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का Power House है।
- एल्वियोली गैसों के आदान-प्रदान का मुख्य स्थान हैं।
- मानव हृदय में चार कक्ष होते हैं।
- जाइलम जल एवं खनिजों का परिवहन करता है।
- फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है।
- नेफ्रॉन किडनी की कार्यात्मक इकाई है।
Chapter Revision Points
| विषय | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| प्रकाश संश्लेषण | CO₂ + H₂O → ग्लूकोज + O₂ |
| लार | Salivary Amylase उपस्थित होता है |
| आमाशय | HCl एवं Pepsin पाए जाते हैं |
| वसा पाचन | Bile Juice + Lipase आवश्यक |
| श्वसन | ATP ऊर्जा उत्पन्न होती है |
| परिवहन | हृदय एवं रक्त महत्वपूर्ण |
| उत्सर्जन | किडनी रक्त को फिल्टर करती है |
Important Exam Points
- Autotrophic Nutrition और Heterotrophic Nutrition में अंतर।
- Photosynthesis की रासायनिक अभिक्रिया।
- Stomata के कार्य।
- HCl का महत्व।
- वसा के पाचन की प्रक्रिया।
- Aerobic एवं Anaerobic Respiration में अंतर।
- Alveoli की संरचना एवं कार्य।
- Double Circulation की व्याख्या।
- Xylem एवं Phloem में अंतर।
- Nephron का लेबलयुक्त चित्र।
Frequently Asked Questions (FAQs)
जीवित रहने के लिए आवश्यक जैविक क्रियाओं को जीवन प्रक्रिया कहते हैं।
पौधों की हरी पत्तियों में उपस्थित क्लोरोप्लास्ट में।
Salivary Amylase।
Power House of the Cell।
ऑक्सीजन।
गैसों का आदान-प्रदान।
ऑक्सीजन का परिवहन।
जल एवं खनिज पदार्थ।
किडनी की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई।
कृत्रिम रूप से रक्त को शुद्ध करने की प्रक्रिया।
Final Summary
इस अध्याय में जीवन प्रक्रियाओं के सभी प्रमुख पहलुओं का अध्ययन किया गया। पोषण से लेकर उत्सर्जन तक प्रत्येक प्रक्रिया जीवों के अस्तित्व के लिए आवश्यक है। यदि विद्यार्थी इस अध्याय के सभी प्रमुख सिद्धांतों, आरेखों, परिभाषाओं और अंतरों को अच्छी तरह समझ लें, तो बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से पूछे जाने वाले अधिकांश प्रश्नों का उत्तर आसानी से दिया जा सकता है।
NCERT Exercise Questions & Answers
अध्याय – जीवन प्रक्रियाएँ (Life Processes)
प्रश्न 1. मानव में वृक्क (Kidney) किस तंत्र का भाग है?
वृक्क मानव के उत्सर्जन तंत्र (Excretory System) का मुख्य भाग है। इसका कार्य रक्त को छानकर अपशिष्ट पदार्थों, अतिरिक्त जल एवं लवणों को मूत्र के रूप में बाहर निकालना है।
प्रश्न 2. पौधों में जाइलम (Xylem) किस कार्य के लिए उत्तरदायी होता है?
जाइलम जड़ों से जल एवं खनिज पदार्थों को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाने का कार्य करता है।
प्रश्न 3. स्वपोषी पोषण के लिए कौन-कौन सी आवश्यकताएँ होती हैं?
- क्लोरोफिल
- सूर्य का प्रकाश
- जल
- कार्बन डाइऑक्साइड
इनकी सहायता से पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन बनाते हैं।
प्रश्न 4. पायरुवेट का विघटन होकर कार्बन डाइऑक्साइड, जल एवं ऊर्जा कहाँ बनती है?
माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) में। माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का Power House कहा जाता है।
प्रश्न 5. हमारे शरीर में वसा (Fat) का पाचन कैसे होता है?
- यकृत पित्त रस (Bile Juice) बनाता है।
- पित्त रस वसा का इमल्सीकरण करता है।
- अग्न्याशय से Lipase एंजाइम निकलता है।
- Lipase वसा को Fatty Acids एवं Glycerol में बदल देता है।
- छोटी आंत इन पदार्थों का अवशोषण कर लेती है।
प्रश्न 6. भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?
लार में Salivary Amylase एंजाइम पाया जाता है जो स्टार्च को माल्टोज में बदलता है। इस प्रकार कार्बोहाइड्रेट का पाचन मुख से प्रारम्भ हो जाता है।
प्रश्न 7. स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ एवं उप-उत्पाद लिखिए।
| आवश्यक परिस्थितियाँ | उप-उत्पाद |
|---|---|
|
क्लोरोफिल सूर्य का प्रकाश जल कार्बन डाइऑक्साइड |
ऑक्सीजन (O₂) |
प्रश्न 8. एरोबिक एवं एनएरोबिक श्वसन में अंतर लिखिए।
| एरोबिक श्वसन | एनएरोबिक श्वसन |
|---|---|
| ऑक्सीजन आवश्यक | ऑक्सीजन आवश्यक नहीं |
| अधिक ऊर्जा उत्पन्न | कम ऊर्जा उत्पन्न |
| ग्लूकोज का पूर्ण विघटन | ग्लूकोज का अपूर्ण विघटन |
| CO₂ एवं H₂O बनते हैं | अल्कोहल या लैक्टिक अम्ल बनता है |
प्रश्न 9. मानव में गैसों के आदान-प्रदान के लिए अधिकतम सतह क्षेत्र कैसे उपलब्ध होता है?
फेफड़ों में उपस्थित लाखों एल्वियोली (Alveoli) गैसों के आदान-प्रदान के लिए विशाल सतह क्षेत्र प्रदान करती हैं। इनकी पतली दीवारें एवं रक्त केशिकाओं का जाल गैसों के आदान-प्रदान को सरल बनाता है।
प्रश्न 10. मनुष्यों में परिवहन तंत्र के घटक कौन-कौन से हैं?
- हृदय (Heart)
- रक्त (Blood)
- रक्त वाहिकाएँ (Blood Vessels)
प्रश्न 11. मानव हृदय में दोहरा परिसंचरण (Double Circulation) क्या है?
जब रक्त एक पूर्ण चक्र में हृदय से दो बार गुजरता है तो उसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं।
प्रश्न 12. पौधों में जाइलम एवं फ्लोएम के कार्य लिखिए।
| जाइलम | फ्लोएम |
|---|---|
| जल एवं खनिजों का परिवहन | भोजन का परिवहन |
| जड़ों से ऊपर की ओर परिवहन | दोनों दिशाओं में परिवहन |
प्रश्न 13. नेफ्रॉन क्या है?
नेफ्रॉन किडनी की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। यह रक्त का निस्यंदन करके मूत्र निर्माण का कार्य करता है।
प्रश्न 14. मानव उत्सर्जन तंत्र के अंगों के नाम लिखिए।
- वृक्क (Kidneys)
- मूत्रवाहिनी (Ureter)
- मूत्राशय (Urinary Bladder)
- मूत्रमार्ग (Urethra)
प्रश्न 15. पौधों में उत्सर्जन कैसे होता है?
- रंध्रों द्वारा गैसों का निष्कासन
- वाष्पोत्सर्जन द्वारा अतिरिक्त जल का निष्कासन
- पुरानी पत्तियों के गिरने द्वारा अपशिष्ट निष्कासन
- गोंद, राल एवं लेटेक्स के रूप में अपशिष्ट संग्रह
NCERT Exercise Summary
इन प्रश्नों के माध्यम से जीवन प्रक्रियाओं अध्याय के सभी प्रमुख विषयों जैसे पोषण, श्वसन, परिवहन एवं उत्सर्जन की पुनरावृत्ति हो जाती है। बोर्ड परीक्षा में इन प्रश्नों एवं इनके सिद्धांतों पर आधारित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
NCERT Intext Questions & Answers
कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय – जीवन प्रक्रियाएँ (Life Processes)
प्रश्न 1. हमारे जैसे जीवों में भोजन की आवश्यकता क्यों होती है?
भोजन जीवों को ऊर्जा प्रदान करता है। इसी ऊर्जा की सहायता से वृद्धि, विकास, श्वसन, उत्सर्जन, गति, प्रजनन तथा अन्य जीवन प्रक्रियाएँ सम्पन्न होती हैं। भोजन शरीर की मरम्मत तथा नई कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है।
प्रश्न 2. जीवन के लिए कौन-सी प्रक्रियाएँ आवश्यक हैं?
- पोषण (Nutrition)
- श्वसन (Respiration)
- परिवहन (Transportation)
- उत्सर्जन (Excretion)
इन सभी प्रक्रियाओं को सामूहिक रूप से जीवन प्रक्रियाएँ कहा जाता है।
प्रश्न 3. स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ क्या हैं?
- क्लोरोफिल
- सूर्य का प्रकाश
- जल
- कार्बन डाइऑक्साइड
प्रश्न 4. प्रकाश संश्लेषण का समीकरण लिखिए।
यह प्रक्रिया सूर्य के प्रकाश तथा क्लोरोफिल की उपस्थिति में होती है।
प्रश्न 5. विषमपोषी जीव भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?
विषमपोषी जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। मनुष्य, पशु एवं अधिकांश सूक्ष्मजीव विषमपोषी होते हैं।
प्रश्न 6. अमीबा भोजन कैसे ग्रहण करता है?
अमीबा अपने कूटपाद (Pseudopodia) की सहायता से भोजन को चारों ओर से घेरकर कोशिका के अंदर ले जाता है। इस प्रक्रिया को एंडोसाइटोसिस कहते हैं।
प्रश्न 7. मनुष्य में भोजन का पाचन कहाँ प्रारम्भ होता है?
मनुष्य में भोजन का पाचन मुख से प्रारम्भ होता है। लार में उपस्थित Salivary Amylase स्टार्च को सरल शर्करा में बदलना शुरू करता है।
प्रश्न 8. HCl का कार्य क्या है?
आमाशय में उपस्थित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) अम्लीय माध्यम प्रदान करता है, जिससे Pepsin एंजाइम सक्रिय होता है। यह हानिकारक जीवाणुओं को भी नष्ट करता है।
प्रश्न 9. छोटी आंत पाचन में क्यों महत्वपूर्ण है?
छोटी आंत में भोजन का अधिकांश पाचन एवं अवशोषण होता है। यहाँ अग्न्याशयी रस, पित्त रस तथा आंत्रीय रस मिलकर भोजन को सरल पदार्थों में बदलते हैं।
प्रश्न 10. ATP को ऊर्जा मुद्रा क्यों कहा जाता है?
ATP (Adenosine Triphosphate) कोशिकाओं में ऊर्जा संग्रहित करता है। जब शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है तब ATP टूटकर ऊर्जा प्रदान करता है। इसी कारण इसे ऊर्जा मुद्रा (Energy Currency) कहा जाता है।
प्रश्न 11. एरोबिक एवं एनएरोबिक श्वसन में क्या अंतर है?
| एरोबिक श्वसन | एनएरोबिक श्वसन |
|---|---|
| ऑक्सीजन आवश्यक | ऑक्सीजन आवश्यक नहीं |
| अधिक ऊर्जा उत्पन्न | कम ऊर्जा उत्पन्न |
| पूर्ण ऑक्सीकरण | अपूर्ण ऑक्सीकरण |
प्रश्न 12. एल्वियोली की संरचना गैसों के आदान-प्रदान के लिए कैसे उपयुक्त है?
एल्वियोली की दीवारें अत्यंत पतली होती हैं तथा इनके चारों ओर रक्त केशिकाओं का जाल होता है। इनका सतह क्षेत्र बहुत अधिक होता है जिससे गैसों का आदान-प्रदान तीव्रता से होता है।
प्रश्न 13. रक्त के मुख्य कार्य क्या हैं?
- ऑक्सीजन का परिवहन
- पोषक तत्वों का परिवहन
- हार्मोन का परिवहन
- अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन
- रोगों से रक्षा
प्रश्न 14. धमनियों एवं शिराओं में अंतर लिखिए।
| धमनियाँ | शिराएँ |
|---|---|
| हृदय से रक्त ले जाती हैं | हृदय तक रक्त लाती हैं |
| दीवार मोटी होती है | दीवार पतली होती है |
| वाल्व नहीं होते | वाल्व होते हैं |
प्रश्न 15. नेफ्रॉन क्या है?
नेफ्रॉन किडनी की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। यह रक्त का निस्यंदन करके मूत्र निर्माण का कार्य करता है।
प्रश्न 16. पौधों में उत्सर्जन कैसे होता है?
- रंध्रों द्वारा गैसों का निष्कासन
- वाष्पोत्सर्जन द्वारा अतिरिक्त जल का निष्कासन
- पुरानी पत्तियों के गिरने द्वारा अपशिष्ट निष्कासन
- राल एवं गोंद के रूप में अपशिष्ट संग्रह
NCERT Intext Summary
इन Intext Questions के माध्यम से जीवन प्रक्रियाओं अध्याय के सभी मूलभूत सिद्धांतों जैसे पोषण, प्रकाश संश्लेषण, पाचन, श्वसन, परिवहन एवं उत्सर्जन की पुनरावृत्ति हो जाती है। बोर्ड परीक्षा में इन अवधारणाओं पर आधारित लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Important Questions & Answers
कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय – जीवन प्रक्रियाएँ (Life Processes)
1 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न
2 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न
| स्वपोषी | परपोषी |
|---|---|
| भोजन स्वयं बनाते हैं | भोजन स्वयं नहीं बना सकते |
| उदाहरण – हरे पौधे | उदाहरण – मनुष्य |
- पेप्सिन एंजाइम को सक्रिय करता है।
- हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है।
- पतली दीवारें
- विशाल सतह क्षेत्र
3 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न
- पौधे CO₂ ग्रहण करते हैं।
- जड़ें जल अवशोषित करती हैं।
- क्लोरोफिल सूर्य का प्रकाश अवशोषित करता है।
- ग्लूकोज का निर्माण होता है।
- ऑक्सीजन वातावरण में मुक्त होती है।
पाचन मुख से प्रारम्भ होकर आमाशय तथा छोटी आंत में पूर्ण होता है। विभिन्न एंजाइम भोजन को सरल पदार्थों में बदलते हैं तथा विल्ली द्वारा अवशोषण किया जाता है।
| एरोबिक | एनएरोबिक |
|---|---|
| ऑक्सीजन आवश्यक | ऑक्सीजन आवश्यक नहीं |
| अधिक ऊर्जा | कम ऊर्जा |
| पूर्ण विघटन | अपूर्ण विघटन |
5 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न
मानव हृदय चार कक्षों वाला पेशीय अंग है जिसमें दो आलिंद एवं दो निलय होते हैं। हृदय रक्त को फेफड़ों तथा पूरे शरीर में पंप करता है।
जब रक्त एक पूर्ण चक्र में हृदय से दो बार गुजरता है तो उसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं।
मानव उत्सर्जन तंत्र में किडनी, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय एवं मूत्रमार्ग शामिल होते हैं। किडनी रक्त का निस्यंदन करती है तथा नेफ्रॉन मूत्र निर्माण का कार्य करता है।
| अंग | कार्य |
|---|---|
| किडनी | रक्त शोधन |
| मूत्रवाहिनी | मूत्र परिवहन |
| मूत्राशय | मूत्र संग्रह |
| मूत्रमार्ग | मूत्र निष्कासन |
पौधों में जाइलम एवं फ्लोएम दो प्रमुख संवहन ऊतक होते हैं। जाइलम जल एवं खनिजों का परिवहन करता है जबकि फ्लोएम भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।
अति महत्वपूर्ण बोर्ड परीक्षा प्रश्न
Quick Exam Revision
- क्लोरोफिल – प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक।
- Salivary Amylase – स्टार्च का पाचन करता है।
- ATP – ऊर्जा मुद्रा।
- Alveoli – गैसों के आदान-प्रदान का स्थान।
- Heart – चार कक्षों वाला अंग।
- Xylem – जल परिवहन।
- Phloem – भोजन परिवहन।
- Nephron – किडनी की कार्यात्मक इकाई।
Continue Learning With IndiaDada
UPSC, SSC CGL, UPTET, Current Affairs, Government Jobs, School Education, Higher Education, Notes, PDF, MCQ, PYQ, Mock Tests और Exam Preparation की सम्पूर्ण सामग्री अब एक ही प्लेटफॉर्म पर।
Daily Current Affairs
Daily Current Affairs Notes, PDF & Analysis
🎯Current Affairs MCQ
Daily Quiz, Practice Sets & Mock Questions
🇮🇳UPSC Preparation
Prelims, CSAT, Mains Notes & PYQs
📑SSC CGL
Notes, Previous Papers & Mock Tests
🧠UPTET Preparation
Latest Notes, MCQ & Practice Sets
💼Government Jobs
Latest Sarkari Naukri & Recruitment Updates
🔥 Important Study Resources
🌐 Important Official Resources
🎯 Popular Exam Categories
🚀 Stay Connected With IndiaDada.com
Daily Current Affairs, UPSC, SSC CGL, UPTET, Government Jobs, Previous Year Papers, Notes, MCQ, Mock Tests तथा Latest Exam Updates प्राप्त करने के लिए IndiaDada.com के साथ जुड़े रहें।
Visit IndiaDada.com