परिचय : राजनीति क्या है?
प्रिय विद्यार्थियों, आज से हम BA प्रथम सेमेस्टर राजनीति विज्ञान (Political Science) के पहले यूनिट की शुरुआत कर रहे हैं। किसी भी विषय को समझने से पहले उसके मूल अर्थ को समझना आवश्यक होता है। इसलिए इस अध्याय में हम सबसे पहले यह जानेंगे कि राजनीति क्या है, राजनीति शब्द कहाँ से आया, राजनीति विज्ञान और राजनीति में क्या अंतर है तथा राजनीति हमारे जीवन में क्यों महत्वपूर्ण है।
सीखने के उद्देश्य (Learning Objectives)
- राजनीति का अर्थ समझना।
- राजनीति शब्द की उत्पत्ति जानना।
- Politics और Political Science का अंतर समझना।
- ग्रीक शब्द Polis का अर्थ जानना।
- राजनीति की आवश्यकता को समझना।
- परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण तथ्यों को याद करना।
सबसे पहले राजनीति को समझते हैं
जब हम सामान्य जीवन में "राजनीति" शब्द सुनते हैं तो हमारे मन में नेता, चुनाव, सरकार और सत्ता जैसी बातें आती हैं। लेकिन राजनीति का वास्तविक अर्थ इससे कहीं अधिक व्यापक है।
यदि कोई व्यक्ति किसी सिद्धांत, नियम या व्यवस्था को व्यवहार में लागू करता है, तो वह राजनीति कहलाती है। जबकि उन सिद्धांतों, नियमों और व्यवस्थाओं का अध्ययन राजनीति विज्ञान कहलाता है।
राजनीति विज्ञान = सिद्धांतों का अध्ययन
राजनीति = सिद्धांतों का व्यवहारिक प्रयोग
उदाहरण के लिए यदि आप लोकतंत्र के सिद्धांत पढ़ रहे हैं तो यह राजनीति विज्ञान है। लेकिन जब कोई व्यक्ति चुनाव लड़ता है, मतदान करता है या शासन व्यवस्था में भाग लेता है तो वह राजनीति है।
राजनीति शब्द की उत्पत्ति
राजनीति शब्द अंग्रेजी के Politics शब्द से बना है। Politics शब्द की उत्पत्ति यूनानी (Greek) भाषा के Polis शब्द से हुई है।
Polis का अर्थ
ग्रीक भाषा में Polis का अर्थ होता है — नगर राज्य (City State)
प्राचीन यूनान में छोटे-छोटे नगर स्वतंत्र राज्यों के रूप में कार्य करते थे। प्रत्येक नगर की अपनी शासन व्यवस्था, कानून और प्रशासन होता था। इन्हीं नगर राज्यों के अध्ययन से राजनीति की अवधारणा विकसित हुई।
राजनीति क्यों आवश्यक है?
मनुष्य समाज में रहता है। समाज में शांति, व्यवस्था, सुरक्षा और विकास बनाए रखने के लिए नियमों की आवश्यकता होती है। इन नियमों का निर्माण, पालन और नियंत्रण राजनीति के माध्यम से होता है।
यदि राजनीति न हो तो समाज में अराजकता फैल सकती है। इसलिए राजनीति समाज को संगठित और व्यवस्थित रखने का महत्वपूर्ण साधन है।
आप प्रतिदिन राजनीति से जुड़े रहते हैं, चाहे आपको इसका एहसास हो या नहीं। विद्यालय के नियम, पंचायत के निर्णय, सरकार की योजनाएँ, चुनाव और कानून—ये सभी राजनीति के ही भाग हैं।
राजनीति और राजनीति विज्ञान में अंतर
| राजनीति विज्ञान | राजनीति |
|---|---|
| सिद्धांतों का अध्ययन | सिद्धांतों का व्यवहारिक प्रयोग |
| शैक्षणिक विषय | व्यावहारिक गतिविधि |
| ज्ञान प्राप्त करना | ज्ञान का उपयोग करना |
| विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है | समाज और शासन में दिखाई देती है |
वास्तविक जीवन उदाहरण
मान लीजिए आपने लोकतंत्र के बारे में पुस्तक में पढ़ा कि जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है। यह राजनीति विज्ञान है।
लेकिन जब आप मतदान करने जाते हैं या कोई व्यक्ति चुनाव लड़ता है, तब वह राजनीति है।
राजनीति विज्ञान सिद्धांत है जबकि राजनीति उसका व्यवहारिक स्वरूप है।
अब तक हमने क्या सीखा?
- राजनीति और राजनीति विज्ञान अलग-अलग अवधारणाएँ हैं।
- Politics शब्द Greek भाषा के Polis शब्द से बना है।
- Polis का अर्थ नगर राज्य होता है।
- राजनीति समाज को व्यवस्थित रखने का माध्यम है।
- राजनीति विज्ञान सिद्धांतों का अध्ययन करता है जबकि राजनीति उन सिद्धांतों का व्यवहारिक उपयोग है।
राजनीति विज्ञान के जनक एवं यूनानी विचारकों का योगदान
प्रिय विद्यार्थियों, अब तक हमने राजनीति शब्द की उत्पत्ति और उसके अर्थ को समझ लिया है। अब हम उस विषय पर पहुँच रहे हैं जहाँ से राजनीति विज्ञान को वास्तविक पहचान मिली। परीक्षा में सबसे अधिक प्रश्न इसी भाग से पूछे जाते हैं। इसलिए इस टॉपिक को बहुत ध्यान से समझिए।
अगर राजनीति विज्ञान एक विशाल वृक्ष है, तो उसके बीज बोने का कार्य यूनानी विचारकों ने किया था। विशेष रूप से सुकरात, प्लेटो और अरस्तु ने राजनीति विज्ञान को एक व्यवस्थित विषय के रूप में विकसित किया।
राजनीति विज्ञान का जन्म कहाँ हुआ?
राजनीति विज्ञान का प्रारम्भ प्राचीन यूनान (Greece) से माना जाता है। यूनान में छोटे-छोटे नगर राज्य (City States) थे। इन नगर राज्यों में शासन व्यवस्था, कानून, नागरिक अधिकार और प्रशासन से जुड़ी समस्याएँ उत्पन्न होती थीं।
इन समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने के लिए यूनानी दार्शनिकों ने गहन अध्ययन किया। इसी अध्ययन से राजनीति विज्ञान का विकास हुआ।
राजनीति विज्ञान की जन्मभूमि — यूनान (Greece)
चार महान व्यक्तित्व जिन्हें कभी नहीं भूलना चाहिए
राजनीति विज्ञान के विकास में चार व्यक्तियों का सबसे अधिक योगदान माना जाता है।
| क्रम | व्यक्तित्व | विशेष पहचान |
|---|---|---|
| 1 | सुकरात (Socrates) | विश्व के प्रथम दार्शनिक |
| 2 | प्लेटो (Plato) | द एकेडमी के संस्थापक |
| 3 | अरस्तु (Aristotle) | राजनीति विज्ञान के जनक |
| 4 | सिकन्दर (Alexander) | विश्व विजेता |
सुकरात (Socrates)
सुकरात को विश्व का प्रथम दार्शनिक माना जाता है। उन्होंने लोगों को प्रश्न पूछकर सत्य की खोज करना सिखाया।
उनकी विचारधारा उस समय के समाज के लिए नई थी। इसलिए कई लोगों ने उनका विरोध किया। लेकिन उनकी मृत्यु के बाद लोगों को उनकी महानता का एहसास हुआ।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- विश्व के प्रथम दार्शनिक – सुकरात
- सुकरात ने प्रश्नोत्तर पद्धति का विकास किया।
- सुकरात यूनानी दर्शन के आधार स्तंभ माने जाते हैं।
प्लेटो (Plato)
प्लेटो, सुकरात के शिष्य थे। उन्होंने अपने गुरु के विचारों को आगे बढ़ाया और शिक्षा तथा राजनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्लेटो ने "The Academy" नामक विश्व की पहली उच्च शिक्षण संस्था स्थापित की।
सुकरात → प्लेटो → अरस्तु → सिकन्दर यह राजनीति विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण गुरु-शिष्य श्रृंखला है।
The Academy क्या थी?
The Academy एक उच्च शिक्षण संस्थान था जहाँ दर्शन, राजनीति, विज्ञान और समाज से जुड़े विषय पढ़ाए जाते थे।
यहीं से शिक्षा प्राप्त करके अरस्तु आगे चलकर राजनीति विज्ञान के जनक बने।
अरस्तु (Aristotle)
अरस्तु प्लेटो के शिष्य थे। इन्हें राजनीति विज्ञान का जनक (Father of Political Science) कहा जाता है।
उन्होंने राजनीति को वैज्ञानिक रूप से समझने का प्रयास किया और शासन व्यवस्था, राज्य तथा नागरिकों के संबंधों का गहराई से अध्ययन किया।
राजनीति विज्ञान का जनक कौन है?
उत्तर: अरस्तु (Aristotle)
अरस्तु की प्रसिद्ध पुस्तक – Politics
अरस्तु ने "Politics" नामक पुस्तक लिखी। यह राजनीति विज्ञान की सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन पुस्तकों में से एक मानी जाती है।
इस पुस्तक में नगर राज्य (City State), शासन व्यवस्था, नागरिकता और राजनीतिक जीवन का विस्तृत वर्णन किया गया है।
Politics पुस्तक की विशेषताएँ
- राज्य की उत्पत्ति का वर्णन
- नगर राज्य की विशेषताएँ
- नागरिकों की भूमिका
- शासन व्यवस्था का विश्लेषण
- राजनीतिक जीवन का महत्व
"मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है"
यह राजनीति विज्ञान का सबसे प्रसिद्ध कथन है।
अरस्तु का मानना था कि मनुष्य अकेला नहीं रह सकता। वह समाज और राज्य में रहकर ही अपना विकास करता है।
इसलिए मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है।
"Man is by Nature a Political Animal" (मनुष्य स्वभाव से एक राजनीतिक प्राणी है।)
अरस्तु के अनुसार राज्य का महत्व
अरस्तु के अनुसार राज्य मनुष्य को सुरक्षा, व्यवस्था और विकास प्रदान करता है।
जो व्यक्ति राज्य में नहीं रहता वह या तो पशु के समान है या फिर देवता के समान।
अर्थात सामान्य मनुष्य के लिए राज्य का हिस्सा बनना आवश्यक है।
सिकन्दर (Alexander)
सिकन्दर, अरस्तु के शिष्य थे। इतिहास में उन्हें विश्व विजेता (World Conqueror) के रूप में जाना जाता है।
उन्होंने अनेक देशों पर विजय प्राप्त की और यूनानी संस्कृति का विस्तार किया।
भारत पर उनका आक्रमण 326 ईसा पूर्व में हुआ था।
सिकन्दर से संबंधित तथ्य
- अरस्तु के शिष्य थे।
- विश्व विजेता कहलाते हैं।
- 326 ईसा पूर्व भारत आए थे।
- यूनानी संस्कृति के विस्तार में योगदान दिया।
गुरु-शिष्य परंपरा (Most Important)
| गुरु | शिष्य |
|---|---|
| सुकरात | प्लेटो |
| प्लेटो | अरस्तु |
| अरस्तु | सिकन्दर |
सु-प्ले-अर-सि सु = सुकरात
प्ले = प्लेटो
अर = अरस्तु
सि = सिकन्दर
अब तक हमने क्या सीखा?
- राजनीति विज्ञान का विकास यूनान में हुआ।
- सुकरात विश्व के प्रथम दार्शनिक थे।
- प्लेटो ने The Academy की स्थापना की।
- अरस्तु राजनीति विज्ञान के जनक हैं।
- अरस्तु ने Politics नामक पुस्तक लिखी।
- मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है।
- सिकन्दर अरस्तु के शिष्य थे।
- गुरु-शिष्य श्रृंखला परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राजनीति की परिभाषाएँ : परंपरागत एवं आधुनिक दृष्टिकोण
प्रिय विद्यार्थियों, अब तक हमने राजनीति शब्द की उत्पत्ति तथा राजनीति विज्ञान के प्रमुख विचारकों का अध्ययन किया। अब हम राजनीति की सबसे महत्वपूर्ण इकाई अर्थात् राजनीति की परिभाषाओं का अध्ययन करेंगे।
यह विषय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्वविद्यालय परीक्षाओं में राजनीति की परिभाषा, परंपरागत परिभाषा तथा आधुनिक परिभाषा से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
जब भी किसी विषय को समझना होता है, सबसे पहले उसकी परिभाषा समझनी पड़ती है। राजनीति के साथ भी यही बात लागू होती है। अलग-अलग विद्वानों ने राजनीति को अपने दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास किया है।
राजनीति की परिभाषाएँ विवादास्पद क्यों हैं?
राजनीति एक गतिशील विषय है। समय के साथ समाज, राज्य, सरकार और मानव जीवन में परिवर्तन होते रहते हैं। इसलिए प्रत्येक विद्वान ने राजनीति को अलग दृष्टिकोण से परिभाषित किया है।
यही कारण है कि राजनीति की कोई एक सर्वमान्य परिभाषा नहीं मिलती।
राजनीति की परिभाषाएँ मुख्यतः दो भागों में विभाजित की जाती हैं—
| परिभाषा का प्रकार | समय अवधि |
|---|---|
| परंपरागत परिभाषा | 17वीं शताब्दी से द्वितीय विश्व युद्ध तक |
| आधुनिक परिभाषा | द्वितीय विश्व युद्ध के बाद |
परंपरागत परिभाषा (Traditional Definition)
17वीं शताब्दी से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध (1945) तक दी गई राजनीति की सभी प्रमुख परिभाषाओं को परंपरागत परिभाषा कहा जाता है।
इन परिभाषाओं में मुख्य रूप से राज्य, सरकार और शासन व्यवस्था पर बल दिया गया है।
गेटेल (Gettell) की परिभाषा
गेटेल के अनुसार —
"राजनीति राज्य के अतीत, वर्तमान तथा भविष्य का अध्ययन है।"
शिक्षक की व्याख्या
गेटेल का मानना था कि यदि किसी व्यक्ति को किसी राज्य की राजनीति समझनी है तो उसे उस राज्य के इतिहास (अतीत), वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं का अध्ययन करना होगा।
उदाहरण
यदि हम भारत की राजनीति को समझना चाहते हैं तो हमें स्वतंत्रता आंदोलन, वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था और भविष्य की नीतियों का अध्ययन करना होगा।
गेटेल → अतीत + वर्तमान + भविष्य = राजनीति
प्रोफेसर जैक्स (Professor Jacks) की परिभाषा
प्रोफेसर जैक्स के अनुसार —
"राजनीति अध्ययन का वह भाग है जो राज्य और सरकार का अध्ययन करता है।"
व्याख्या
इस परिभाषा में राजनीति को राज्य और सरकार तक सीमित माना गया है। अर्थात यदि कोई व्यक्ति राज्य की संरचना तथा सरकार की कार्यप्रणाली को समझता है तो वह राजनीति को समझ सकता है।
राज्य + सरकार = राजनीति (जैक्स)
पॉल जेनेट (Paul Janet) की परिभाषा
पॉल जेनेट के अनुसार —
"राजनीति समाज विज्ञान का वह भाग है जो राज्य के आधारों तथा शासन के सिद्धांतों का अध्ययन करता है।"
व्याख्या
पॉल जेनेट ने राजनीति को समाज विज्ञान का महत्वपूर्ण अंग माना। उनके अनुसार राजनीति का मुख्य उद्देश्य राज्य तथा शासन व्यवस्था के मूल सिद्धांतों का अध्ययन करना है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- राजनीति = समाज विज्ञान का भाग
- राज्य के आधारों का अध्ययन
- शासन सिद्धांतों का अध्ययन
गार्नर (Garner) की परिभाषा
गार्नर के अनुसार —
"राजनीति राज्य से प्रारम्भ होती है और राज्य पर ही समाप्त होती है।"
यह राजनीति विज्ञान की सबसे प्रसिद्ध परिभाषाओं में से एक है।
गार्नर का मानना था कि राजनीति का सम्पूर्ण क्षेत्र राज्य के इर्द-गिर्द घूमता है।
"राजनीति राज्य से प्रारम्भ होती है और राज्य पर समाप्त होती है" — यह कथन किसका है?
उत्तर: गार्नर
परंपरागत परिभाषाओं का सार
| विद्वान | मुख्य विचार |
|---|---|
| गेटेल | राज्य का अतीत, वर्तमान और भविष्य |
| जैक्स | राज्य और सरकार का अध्ययन |
| पॉल जेनेट | राज्य एवं शासन सिद्धांतों का अध्ययन |
| गार्नर | राज्य से प्रारम्भ और राज्य पर समाप्त |
आधुनिक परिभाषा (Modern Definition)
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद राजनीति का क्षेत्र बहुत व्यापक हो गया। अब केवल राज्य और सरकार ही राजनीति का विषय नहीं रहे बल्कि शक्ति, संघर्ष, समाज, संगठन तथा मानव व्यवहार को भी राजनीति का भाग माना जाने लगा।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दी गई परिभाषाएँ = आधुनिक परिभाषाएँ
मैक्स वेबर (Max Weber) की परिभाषा
मैक्स वेबर के अनुसार —
"राजनीति शक्ति के लिए संघर्ष तथा सत्ता को प्रभावित करने की कला है।"
व्याख्या
मैक्स वेबर का मानना था कि राजनीति का मुख्य उद्देश्य शक्ति प्राप्त करना और सत्ता को प्रभावित करना है।
राजनीतिक दलों, नेताओं तथा विभिन्न समूहों के बीच शक्ति प्राप्त करने के लिए जो संघर्ष होता है वही राजनीति है।
उदाहरण
चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दल सत्ता प्राप्त करने के लिए संघर्ष करते हैं। यह राजनीति का आधुनिक स्वरूप है।
रॉबर्ट की परिभाषा
रॉबर्ट के अनुसार —
"राजनीति मानव समाज पर शासन करने की कला और व्यवहार है।"
रॉबर्ट राजनीति को एक कला मानते हैं जिसके माध्यम से समाज का संचालन किया जाता है।
टी. बैनन (T. Bannon) की परिभाषा
टी. बैनन के अनुसार —
"राजनीति सभी समस्याओं की अचूक औषधि नहीं है, बल्कि यह संभावनाओं की कला है।"
व्याख्या
टी. बैनन का मानना था कि राजनीति हर समस्या का समाधान नहीं कर सकती, लेकिन राजनीति के माध्यम से समस्याओं के समाधान की संभावनाएँ अवश्य उत्पन्न की जा सकती हैं।
राजनीति जादू नहीं है, बल्कि समस्याओं को हल करने का एक माध्यम है।
परंपरागत एवं आधुनिक परिभाषाओं में अंतर
| परंपरागत परिभाषा | आधुनिक परिभाषा |
|---|---|
| राज्य पर केन्द्रित | शक्ति एवं संघर्ष पर केन्द्रित |
| सरकार का अध्ययन | मानव व्यवहार का अध्ययन |
| सीमित क्षेत्र | व्यापक क्षेत्र |
| 1945 से पहले | 1945 के बाद |
अध्यापक द्वारा अंतिम निष्कर्ष
विद्यार्थियों, राजनीति की परिभाषाओं को पढ़ते समय केवल विद्वानों के नाम याद करना पर्याप्त नहीं है। आपको यह भी समझना होगा कि प्रत्येक विद्वान राजनीति को किस दृष्टिकोण से देख रहा है।
परंपरागत विचारक राजनीति को राज्य और सरकार तक सीमित रखते हैं जबकि आधुनिक विचारक राजनीति को शक्ति, संघर्ष, संगठन और मानव व्यवहार से जोड़ते हैं।
- गेटेल → अतीत, वर्तमान, भविष्य
- जैक्स → राज्य और सरकार
- पॉल जेनेट → राज्य और शासन सिद्धांत
- गार्नर → राज्य से शुरू, राज्य पर समाप्त
- मैक्स वेबर → शक्ति के लिए संघर्ष
- रॉबर्ट → शासन करने की कला
- टी. बैनन → संभावनाओं की कला
राजनीति का स्वरूप, व्यापकता एवं विभिन्न दृष्टिकोण
प्रिय विद्यार्थियों, अब तक हमने राजनीति की उत्पत्ति, राजनीति विज्ञान के जनक तथा राजनीति की विभिन्न परिभाषाओं का अध्ययन किया। अब हम राजनीति के वास्तविक स्वरूप को समझेंगे। यह जानना आवश्यक है कि राजनीति केवल चुनाव, सरकार और नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित करती है।
अधिकांश विद्यार्थी राजनीति को केवल नेताओं और चुनावों तक सीमित समझते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि राजनीति परिवार, समाज, विद्यालय, कार्यालय और राष्ट्र—सभी जगह मौजूद होती है।
राजनीति का स्वरूप (Nature of Politics)
राजनीति एक अत्यंत व्यापक और गतिशील विषय है। समय, समाज, परिस्थितियों और शासन व्यवस्थाओं के अनुसार राजनीति का स्वरूप बदलता रहता है।
राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का साधन नहीं है, बल्कि समाज को व्यवस्थित करने, नियम बनाने, अधिकारों की रक्षा करने तथा सामूहिक जीवन को संचालित करने की प्रक्रिया भी है।
राजनीति के स्वरूप की मुख्य विशेषताएँ
- राजनीति एक व्यापक विषय है।
- राजनीति समाज के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित करती है।
- राजनीति निरंतर परिवर्तनशील है।
- राजनीति मानव जीवन का अभिन्न अंग है।
- राजनीति राज्य और समाज दोनों से संबंधित है।
राजनीति की व्यापकता (Scope of Politics)
प्राचीन समय में राजनीति का अध्ययन मुख्यतः राज्य और सरकार तक सीमित था। लेकिन आधुनिक युग में राजनीति का क्षेत्र बहुत अधिक विस्तृत हो गया है।
आज राजनीति केवल संसद और विधानसभाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, अर्थव्यवस्था, समाज, संस्कृति, अंतरराष्ट्रीय संबंध और मानव अधिकारों तक फैली हुई है।
| क्षेत्र | राजनीति का प्रभाव |
|---|---|
| शिक्षा | शिक्षा नीतियाँ एवं पाठ्यक्रम निर्माण |
| अर्थव्यवस्था | कर व्यवस्था, बजट और योजनाएँ |
| समाज | सामाजिक न्याय और अधिकार |
| अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र | विदेश नीति एवं कूटनीति |
| पर्यावरण | पर्यावरण संरक्षण संबंधी नीतियाँ |
राजनीति की प्रमुख विशेषताएँ
1. राजनीति एक व्यापक अवधारणा है
राजनीति का संबंध केवल सरकार से नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति से है। हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में राजनीति से प्रभावित होता है।
2. राजनीति गतिशील है
राजनीति स्थिर नहीं रहती। समय के साथ विचार, नीतियाँ और शासन प्रणालियाँ बदलती रहती हैं।
3. राजनीति शक्ति से संबंधित है
राजनीति में शक्ति प्राप्त करने और उसका उपयोग करने की प्रक्रिया शामिल होती है।
4. राजनीति संघर्ष और सहयोग दोनों है
राजनीति में विभिन्न विचारधाराओं के बीच संघर्ष भी होता है और समाज के हित के लिए सहयोग भी किया जाता है।
राजनीति का मूल संबंध शक्ति, शासन, राज्य, सरकार और समाज से होता है।
सामान्य व्यक्ति का राजनीति के प्रति दृष्टिकोण
सामान्यतः लोग राजनीति को केवल चुनाव, राजनीतिक दलों, नेताओं, सांसदों और विधायकों की गतिविधियों तक सीमित समझते हैं।
जब भी राजनीति शब्द सुनाई देता है तो अधिकांश लोगों के मन में चुनाव प्रचार, सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक भाषणों की छवि बनती है।
अधिकांश लोग मानते हैं कि राजनीति केवल नेताओं का कार्य है, जबकि वास्तव में राजनीति समाज के प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी होती है।
लोग राजनीति को गलत क्यों समझते हैं?
इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि आम जनता राजनीति के व्यापक स्वरूप को नहीं समझती। वे राजनीति को केवल दलगत गतिविधियों और चुनावों तक सीमित मान लेते हैं।
वास्तव में राजनीति जीवन के हर क्षेत्र में उपस्थित रहती है।
उदाहरण
- परिवार में निर्णय लेना
- विद्यालय में नियम बनाना
- कार्यालय में पदों का वितरण
- समाज में नेतृत्व का चयन
इन सभी गतिविधियों में राजनीति का तत्व किसी न किसी रूप में मौजूद होता है।
राजनीति के बारे में प्रमुख भ्रांतियाँ
भ्रांति 1
राजनीति केवल नेताओं का काम है।
सत्य: राजनीति समाज के प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करती है।
भ्रांति 2
राजनीति केवल चुनाव तक सीमित है।
सत्य: राजनीति शासन, समाज, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक फैली हुई है।
भ्रांति 3
राजनीति का अर्थ केवल सत्ता प्राप्त करना है।
सत्य: राजनीति का उद्देश्य समाज का संगठन और संचालन भी है।
राजनीति और समाज का संबंध
राजनीति और समाज एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। समाज के बिना राजनीति का अस्तित्व संभव नहीं है और राजनीति के बिना समाज में व्यवस्था बनाए रखना कठिन हो जाता है।
राजनीति समाज की आवश्यकताओं के अनुसार नियम और नीतियाँ बनाती है तथा समाज उन नीतियों के अनुसार कार्य करता है।
यदि समाज में शिक्षा का स्तर कम है तो सरकार शिक्षा नीति बनाती है। यदि बेरोजगारी बढ़ती है तो रोजगार योजनाएँ बनाई जाती हैं। यही राजनीति और समाज का संबंध है।
राजनीति क्यों आवश्यक है?
मानव समाज में शांति, व्यवस्था और विकास बनाए रखने के लिए राजनीति आवश्यक है।
- कानून बनाने के लिए
- न्याय व्यवस्था बनाए रखने के लिए
- अधिकारों की रक्षा के लिए
- संसाधनों के उचित वितरण के लिए
- राष्ट्रीय विकास के लिए
राजनीति का आधुनिक महत्व
आज के समय में राजनीति का महत्व पहले से अधिक बढ़ गया है। लोकतंत्र, मानव अधिकार, सामाजिक न्याय और वैश्वीकरण के कारण राजनीति का प्रभाव विश्व के प्रत्येक नागरिक तक पहुँच चुका है।
राजनीति अब केवल राज्य संचालन का विषय नहीं रही, बल्कि यह मानव जीवन के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।
- राजनीति एक व्यापक एवं गतिशील विषय है।
- राजनीति केवल चुनावों तक सीमित नहीं है।
- राजनीति समाज के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित करती है।
- सामान्य व्यक्ति राजनीति को सीमित रूप में समझता है।
- राजनीति और समाज का गहरा संबंध है।
- राजनीति मानव जीवन का अभिन्न अंग है।
अब तक हमने क्या सीखा?
- राजनीति का स्वरूप व्यापक और परिवर्तनशील है।
- राजनीति का प्रभाव समाज के हर क्षेत्र में दिखाई देता है।
- सामान्य व्यक्ति राजनीति को अक्सर गलत तरीके से समझता है।
- राजनीति के बारे में कई भ्रांतियाँ प्रचलित हैं।
- राजनीति समाज को संगठित और व्यवस्थित रखने का महत्वपूर्ण साधन है।
राजनीति के विषय में शास्त्रीय दृष्टिकोण एवं अरस्तु का सिद्धांत
प्रिय विद्यार्थियों, अब तक हमने राजनीति की उत्पत्ति, राजनीति विज्ञान के जनक, विभिन्न परिभाषाएँ तथा राजनीति के स्वरूप का अध्ययन किया। अब हम राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात् शास्त्रीय दृष्टिकोण (Classical Approach) का अध्ययन करेंगे।
यह टॉपिक विश्वविद्यालय परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि राजनीति विज्ञान की नींव इसी दृष्टिकोण पर आधारित है।
यदि राजनीति विज्ञान को एक भवन माना जाए तो उसका आधार शास्त्रीय विचारकों ने तैयार किया था। विशेष रूप से प्लेटो और अरस्तु ने राजनीति को एक वैज्ञानिक विषय का रूप प्रदान किया।
शास्त्रीय दृष्टिकोण क्या है?
शास्त्रीय दृष्टिकोण वह दृष्टिकोण है जिसमें राजनीति को राज्य, नागरिक और नैतिक जीवन के साथ जोड़कर देखा जाता है।
प्राचीन यूनानी विचारकों का मानना था कि राजनीति का उद्देश्य केवल शासन करना नहीं है बल्कि नागरिकों को एक अच्छा और आदर्श जीवन प्रदान करना भी है।
राजनीति का अध्ययन राज्य, नागरिक और उत्तम जीवन की प्राप्ति के संदर्भ में करना ही शास्त्रीय दृष्टिकोण कहलाता है।
प्लेटो का राजनीतिक दर्शन
प्लेटो प्राचीन यूनान के महान दार्शनिक थे। वे सुकरात के शिष्य और अरस्तु के गुरु थे।
प्लेटो का विश्वास था कि समाज में न्याय और नैतिकता स्थापित करने के लिए एक आदर्श राज्य (Ideal State) की आवश्यकता होती है।
प्लेटो के अनुसार आदर्श राज्य
- राज्य का संचालन बुद्धिमान व्यक्तियों द्वारा होना चाहिए।
- शिक्षा को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए।
- न्याय समाज का आधार होना चाहिए।
- प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
परीक्षा हेतु तथ्य
- प्लेटो — सुकरात के शिष्य
- अरस्तु — प्लेटो के शिष्य
- The Academy की स्थापना — प्लेटो
- आदर्श राज्य का सिद्धांत — प्लेटो
अरस्तु का राजनीतिक दर्शन
अरस्तु राजनीति विज्ञान के जनक माने जाते हैं। उन्होंने राजनीति को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझाया।
अरस्तु का मानना था कि राज्य मानव जीवन की स्वाभाविक आवश्यकता है और मनुष्य राज्य के भीतर रहकर ही अपना पूर्ण विकास कर सकता है।
"मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है।"
नगर-राज्य (City State) की अवधारणा
प्राचीन यूनान में छोटे-छोटे स्वतंत्र राज्य होते थे जिन्हें नगर-राज्य (Polis) कहा जाता था।
प्रत्येक नगर-राज्य की अपनी सरकार, कानून, सेना और प्रशासन होता था।
अरस्तु ने इन नगर-राज्यों का अध्ययन करके राजनीति विज्ञान के सिद्धांत विकसित किए।
नगर-राज्य की विशेषताएँ
- छोटा भौगोलिक क्षेत्र
- स्वतंत्र शासन व्यवस्था
- नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी
- सामूहिक निर्णय प्रणाली
- सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन का केंद्र
"मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है" — विस्तृत व्याख्या
यह कथन अरस्तु द्वारा दिया गया था और राजनीति विज्ञान का सबसे प्रसिद्ध कथन माना जाता है।
अरस्तु का मानना था कि मनुष्य अकेले नहीं रह सकता। उसे अपने जीवन के लिए परिवार, समाज और राज्य की आवश्यकता होती है।
मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति तथा सुरक्षा के लिए समाज और राज्य में रहता है। इसलिए वह स्वभाव से राजनीतिक प्राणी कहलाता है।
इस कथन का वास्तविक अर्थ
- मनुष्य सामाजिक प्राणी है।
- मनुष्य नियमों और कानूनों के अंतर्गत रहना पसंद करता है।
- मनुष्य समाज के साथ मिलकर कार्य करता है।
- मनुष्य शासन व्यवस्था को प्रभावित करता है।
- मनुष्य राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेता है।
जब आप विद्यालय में कक्षा मॉनिटर चुनते हैं, किसी समिति का चुनाव करते हैं या किसी समूह का नेतृत्व तय करते हैं, तब आप राजनीति के एक छोटे रूप का अनुभव कर रहे होते हैं।
राज्य का महत्व — अरस्तु के अनुसार
अरस्तु के अनुसार राज्य केवल प्रशासनिक संस्था नहीं है बल्कि यह मनुष्य के विकास का सर्वोच्च माध्यम है।
राज्य मनुष्य को सुरक्षा, न्याय, शिक्षा और विकास के अवसर प्रदान करता है।
| राज्य की भूमिका | लाभ |
|---|---|
| सुरक्षा | जीवन एवं संपत्ति की रक्षा |
| न्याय | समान अवसर एवं कानून |
| शिक्षा | ज्ञान एवं विकास |
| प्रशासन | व्यवस्था बनाए रखना |
| कल्याण | जनहितकारी योजनाएँ |
राज्य के बाहर मनुष्य की स्थिति
अरस्तु का मानना था कि जो व्यक्ति राज्य में नहीं रहता वह या तो पशु के समान है या देवता के समान।
क्योंकि सामान्य मनुष्य के लिए सामाजिक और राजनीतिक जीवन आवश्यक है।
"जो व्यक्ति राज्य में नहीं रहता, वह या तो पशु है या देवता।" — अरस्तु
प्लेटो और अरस्तु में अंतर
| प्लेटो | अरस्तु |
|---|---|
| आदर्श राज्य पर बल | व्यावहारिक राज्य पर बल |
| दार्शनिक दृष्टिकोण | वैज्ञानिक दृष्टिकोण |
| कल्पनात्मक विचार | व्यावहारिक विचार |
| न्याय पर जोर | राज्य और नागरिक पर जोर |
शास्त्रीय दृष्टिकोण का महत्व
- राजनीति विज्ञान की नींव रखी।
- राज्य और नागरिक संबंध स्पष्ट किए।
- राजनीति को नैतिकता से जोड़ा।
- लोकतांत्रिक विचारों को विकसित किया।
- आधुनिक राजनीति विज्ञान के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।
- शास्त्रीय दृष्टिकोण = राज्य + नागरिक + आदर्श जीवन
- प्लेटो = आदर्श राज्य
- अरस्तु = राजनीति विज्ञान के जनक
- नगर राज्य = Polis
- मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है
- राज्य मानव विकास का माध्यम है
अब तक हमने क्या सीखा?
- शास्त्रीय दृष्टिकोण राजनीति का प्राचीन दृष्टिकोण है।
- प्लेटो ने आदर्श राज्य की अवधारणा दी।
- अरस्तु ने राजनीति को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।
- नगर-राज्य राजनीति विज्ञान का मूल आधार था।
- मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है।
- राज्य मानव जीवन के विकास के लिए आवश्यक है।
अध्याय पुनरावृत्ति, महत्वपूर्ण प्रश्न, MCQ एवं परीक्षा तैयारी
अध्याय सारांश (Chapter Summary)
इस अध्याय में हमने राजनीति शब्द की उत्पत्ति, राजनीति विज्ञान और राजनीति के अंतर, यूनानी विचारकों के योगदान, अरस्तु के राजनीतिक दर्शन, राजनीति की परिभाषाओं, राजनीति की व्यापकता तथा शास्त्रीय दृष्टिकोण का अध्ययन किया।
- Politics शब्द Greek भाषा के Polis शब्द से बना है।
- Polis का अर्थ नगर-राज्य है।
- अरस्तु राजनीति विज्ञान के जनक हैं।
- Politics पुस्तक अरस्तु ने लिखी।
- मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है।
- राजनीति की परिभाषाएँ परंपरागत एवं आधुनिक दो प्रकार की हैं।
- राजनीति समाज के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित करती है।
- Politics → Polis → City State
- Father of Political Science → Aristotle
- First Philosopher → Socrates
- The Academy → Plato
- Politics Book → Aristotle
- Political Animal → Aristotle
- Garner → State starts and ends Politics
- Max Weber → Struggle for Power
स्मरण ट्रिक्स (Memory Tricks)
यूनानी गुरु-शिष्य श्रृंखला
सु → प्ले → अर → सि
- सु = सुकरात
- प्ले = प्लेटो
- अर = अरस्तु
- सि = सिकन्दर
परंपरागत परिभाषा याद करने की ट्रिक
गे-जा-पॉ-गा
- गे = गेटेल
- जा = जैक्स
- पॉ = पॉल जेनेट
- गा = गार्नर
NCERT शैली प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. राजनीति शब्द की उत्पत्ति कहाँ से हुई?
उत्तर: राजनीति शब्द अंग्रेजी के Politics शब्द से बना है, जो Greek भाषा के Polis शब्द से निकला है।
प्रश्न 2. Polis का क्या अर्थ है?
उत्तर: Polis का अर्थ नगर-राज्य (City State) होता है।
प्रश्न 3. राजनीति विज्ञान का जनक किसे कहा जाता है?
उत्तर: अरस्तु को राजनीति विज्ञान का जनक कहा जाता है।
प्रश्न 4. Politics पुस्तक किसने लिखी?
उत्तर: अरस्तु ने।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
- राजनीति और राजनीति विज्ञान में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- Polis शब्द का अर्थ बताइए।
- अरस्तु को राजनीति विज्ञान का जनक क्यों कहा जाता है?
- The Academy क्या थी?
- मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है – व्याख्या कीजिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
- राजनीति की परंपरागत एवं आधुनिक परिभाषाओं का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।
- अरस्तु के राजनीतिक विचारों की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
- राजनीति के विषय में शास्त्रीय दृष्टिकोण का वर्णन कीजिए।
- राजनीति के स्वरूप एवं क्षेत्र का विश्लेषण कीजिए।
- राजनीति विज्ञान के विकास में यूनानी विचारकों के योगदान का वर्णन कीजिए।
30 महत्वपूर्ण MCQs
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1. राजनीति शब्द किस भाषा से आया है? | ग्रीक |
| 2. Politics शब्द किस शब्द से बना है? | Polis |
| 3. Polis का अर्थ क्या है? | नगर राज्य |
| 4. राजनीति विज्ञान का जनक कौन है? | अरस्तु |
| 5. Politics पुस्तक किसने लिखी? | अरस्तु |
| 6. प्रथम दार्शनिक कौन थे? | सुकरात |
| 7. The Academy की स्थापना किसने की? | प्लेटो |
| 8. प्लेटो किसके शिष्य थे? | सुकरात |
| 9. अरस्तु किसके शिष्य थे? | प्लेटो |
| 10. सिकन्दर किसके शिष्य थे? | अरस्तु |
| 11. "मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है" कथन किसका है? | अरस्तु |
| 12. गार्नर किस पर बल देते हैं? | राज्य |
| 13. राजनीति राज्य से शुरू और समाप्त होती है – किसका कथन? | गार्नर |
| 14. गेटेल ने राजनीति को किसका अध्ययन कहा? | अतीत, वर्तमान, भविष्य |
| 15. जैक्स ने राजनीति को किसका अध्ययन कहा? | राज्य और सरकार |
| 16. पॉल जेनेट ने राजनीति को किसका अध्ययन माना? | राज्य एवं शासन सिद्धांत |
| 17. आधुनिक परिभाषा कब से प्रारंभ मानी जाती है? | द्वितीय विश्व युद्ध के बाद |
| 18. परंपरागत परिभाषा कब तक मानी जाती है? | द्वितीय विश्व युद्ध तक |
| 19. शक्ति के लिए संघर्ष किसने कहा? | मैक्स वेबर |
| 20. राजनीति को शासन की कला किसने कहा? | रॉबर्ट |
| 21. राजनीति संभावनाओं की कला है – किसका कथन? | टी. बैनन |
| 22. नगर-राज्य की अवधारणा कहाँ विकसित हुई? | यूनान |
| 23. राजनीति विज्ञान की जन्मभूमि कौन है? | यूनान |
| 24. अरस्तु की प्रसिद्ध पुस्तक कौन सी है? | Politics |
| 25. आदर्श राज्य की अवधारणा किसने दी? | प्लेटो |
| 26. राजनीति का संबंध किससे है? | राज्य, सरकार, समाज |
| 27. शास्त्रीय दृष्टिकोण किससे संबंधित है? | राज्य और नागरिक |
| 28. राजनीति विज्ञान का सबसे प्रसिद्ध कथन कौन सा है? | मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है |
| 29. राजनीति का मूल उद्देश्य क्या है? | सामाजिक व्यवस्था |
| 30. राजनीति का आधुनिक स्वरूप किससे जुड़ा है? | शक्ति एवं संघर्ष |
Previous Year Exam Style Questions
- राजनीति शब्द की उत्पत्ति पर टिप्पणी लिखिए।
- अरस्तु को राजनीति विज्ञान का जनक क्यों कहा जाता है?
- परंपरागत और आधुनिक परिभाषाओं में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- नगर राज्य की अवधारणा का वर्णन कीजिए।
- राजनीति के विषय में शास्त्रीय दृष्टिकोण का विश्लेषण कीजिए।
Frequently Asked Questions (FAQ)
क्या राजनीति और राजनीति विज्ञान एक ही हैं?
नहीं। राजनीति विज्ञान सिद्धांतों का अध्ययन है जबकि राजनीति उनका व्यवहारिक प्रयोग है।
राजनीति विज्ञान का जनक कौन है?
अरस्तु।
Politics पुस्तक का लेखक कौन है?
अरस्तु।
प्रथम दार्शनिक किसे माना जाता है?
सुकरात।
Polis शब्द का अर्थ क्या है?
नगर-राज्य।
निष्कर्ष (Conclusion)
राजनीति विज्ञान मानव समाज, राज्य, सरकार और शक्ति के अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय है। इसकी जड़ें प्राचीन यूनान में मिलती हैं जहाँ सुकरात, प्लेटो और अरस्तु जैसे महान विचारकों ने इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राजनीति केवल शासन व्यवस्था का अध्ययन नहीं है बल्कि यह मानव जीवन को व्यवस्थित और उन्नत बनाने का एक माध्यम भी है।
यदि आप केवल 10 तथ्य याद कर लें — Polis, Aristotle, Politics Book, Political Animal, Socrates, Plato, Academy, Garner, Max Weber और Traditional vs Modern Definition — तो इस यूनिट के अधिकांश प्रश्न आसानी से हल कर सकते हैं।
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