अंश पूंजी का लेखांकन : परिचय
जब किसी कंपनी को अपने व्यवसाय का विस्तार करना होता है, नई मशीनें खरीदनी होती हैं, उत्पादन बढ़ाना होता है या नए प्रोजेक्ट शुरू करने होते हैं, तब उसे बड़ी मात्रा में पूंजी की आवश्यकता पड़ती है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए कंपनी आम जनता से धन एकत्रित करती है। आम जनता से धन जुटाने की इस प्रक्रिया को अंशों (Shares) के निर्गमन के माध्यम से पूरा किया जाता है।
लेखांकन की दृष्टि से अंश पूंजी (Share Capital) अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी अध्याय में अंशों के निर्गमन, आवेदन राशि, आवंटन राशि, मांग राशि तथा विभिन्न लेखा प्रविष्टियों का अध्ययन किया जाता है। यह अध्याय कक्षा 12 लेखाशास्त्र के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। :contentReference[oaicite:0]{index=0}
याद रखें: कंपनी द्वारा जनता से प्राप्त अंश राशि को ही अंश पूंजी (Share Capital) कहा जाता है।
सीखने के उद्देश्य (Learning Objectives)
- अंश (Share) का अर्थ समझना।
- अंश पूंजी की अवधारणा को जानना।
- कंपनी द्वारा अंश निर्गमन की प्रक्रिया समझना।
- अंशों के विभिन्न प्रकारों का अध्ययन करना।
- अंशों के अंकित मूल्य एवं निर्गम मूल्य में अंतर समझना।
- प्रीमियम पर निर्गमित अंशों का लेखांकन सीखना।
- बोर्ड परीक्षा के महत्वपूर्ण प्रश्नों की तैयारी करना।
अंश (Share) क्या है?
किसी कंपनी की कुल पूंजी को छोटे-छोटे बराबर भागों में विभाजित किया जाता है। इन छोटे भागों को अंश (Share) कहा जाता है।
जो व्यक्ति किसी कंपनी का अंश खरीदता है, वह उस कंपनी का आंशिक स्वामी (Part Owner) बन जाता है। ऐसे व्यक्ति को अंशधारी (Shareholder) कहा जाता है।
परिभाषा: कंपनी की पूंजी का वह सबसे छोटा भाग जो निवेशकों को उपलब्ध कराया जाता है, अंश (Share) कहलाता है।
अंश पूंजी (Share Capital) क्या है?
कंपनी द्वारा अंशों के निर्गमन के माध्यम से प्राप्त की गई कुल पूंजी को अंश पूंजी कहा जाता है।
उदाहरण के लिए यदि किसी कंपनी ने ₹10 मूल्य के 50,000 अंश जारी किए हैं, तो कंपनी की अंश पूंजी होगी:
अंश पूंजी = अंशों की संख्या × प्रति अंश अंकित मूल्य
= 50,000 × ₹10
= ₹5,00,000
अंशों के प्रकार (Types of Shares)
| अंश का प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| समता अंश (Equity Shares) | सामान्य स्वामित्व अधिकार प्रदान करते हैं |
| अधिमानी अंश (Preference Shares) | लाभांश एवं पूंजी वापसी में प्राथमिकता प्राप्त होती है |
व्यवहारिक जीवन में अधिकांश कंपनियाँ समता अंश (Equity Shares) जारी करती हैं क्योंकि इनके माध्यम से कंपनी को स्थायी पूंजी प्राप्त होती है।
अंकित मूल्य एवं निर्गम मूल्य
| आधार | अंकित मूल्य (Face Value) | निर्गम मूल्य (Issue Price) |
|---|---|---|
| अर्थ | अंश का मूल मूल्य | जिस मूल्य पर अंश जारी किया जाता है |
| निर्धारण | कंपनी द्वारा तय | निर्गमन की स्थिति पर निर्भर |
| उदाहरण | ₹10 प्रति अंश | ₹10, ₹12 या ₹8 |
वास्तविक जीवन उदाहरण
मान लीजिए एक कंपनी को अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए ₹10,00,000 की आवश्यकता है। कंपनी ₹10 मूल्य के 1,00,000 अंश जारी करती है।
यदि सभी अंश निवेशकों द्वारा खरीद लिए जाते हैं, तो कंपनी को आवश्यक पूंजी प्राप्त हो जाती है और निवेशक कंपनी के अंशधारी बन जाते हैं।
Board Exam Tip: अंश, अंशधारी, अंश पूंजी, अंकित मूल्य तथा निर्गम मूल्य की परिभाषाएँ परीक्षा में बार-बार पूछी जाती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
- अंश कंपनी की पूंजी का सबसे छोटा भाग होता है।
- अंश खरीदने वाला व्यक्ति अंशधारी कहलाता है।
- अंश पूंजी कंपनी की स्वामित्व पूंजी होती है।
- अंशों का निर्गमन जनता से धन जुटाने का प्रमुख माध्यम है।
- समता अंश एवं अधिमानी अंश अंशों के प्रमुख प्रकार हैं।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न
- अंश से आप क्या समझते हैं?
- अंशधारी किसे कहते हैं?
- अंश पूंजी की परिभाषा लिखिए।
- अंकित मूल्य एवं निर्गम मूल्य में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- समता अंश एवं अधिमानी अंश में अंतर लिखिए।
अंश निर्गमन की प्रक्रिया (Issue of Shares)
जब कोई कंपनी जनता से पूंजी प्राप्त करने के लिए अंश जारी करती है, तो उसे अंश निर्गमन (Issue of Shares) कहा जाता है। सामान्यतः कंपनी पूरी राशि एक बार में नहीं लेती, बल्कि इसे विभिन्न चरणों में वसूल किया जाता है।
यह व्यवस्था निवेशकों के लिए सुविधाजनक होती है तथा कंपनी को भी समय-समय पर पूंजी प्राप्त होती रहती है।
महत्वपूर्ण: अधिकांश बोर्ड परीक्षाओं में अंश निर्गमन की पूरी प्रक्रिया से Journal Entries पूछी जाती हैं।
अंश निर्गमन के प्रमुख चरण
| चरण | विवरण |
|---|---|
| Application Money | आवेदन के समय प्राप्त राशि |
| Allotment Money | अंश आवंटन के समय प्राप्त राशि |
| First Call | प्रथम मांग राशि |
| Final Call | अंतिम मांग राशि |
Application Money (आवेदन राशि)
जब निवेशक अंश प्राप्त करने हेतु आवेदन करता है, तब उसे आवेदन पत्र के साथ एक निश्चित राशि जमा करनी होती है। इसे आवेदन राशि कहा जाता है।
उदाहरण:
10,000 अंश ₹10 प्रति अंश जारी किए गए।
आवेदन राशि = ₹3 प्रति अंश
कुल आवेदन राशि = 10,000 × ₹3 = ₹30,000
Application Money की Journal Entry
Bank A/c Dr.
To Share Application A/c
(आवेदन राशि प्राप्त होने पर)
Share Application A/c Dr.
To Share Capital A/c
(आवेदन राशि पूंजी में स्थानांतरित करने पर)
Allotment Money (आवंटन राशि)
आवेदन स्वीकार होने के बाद कंपनी अंशों का आवंटन करती है। इस समय जो राशि माँगी जाती है, उसे आवंटन राशि (Allotment Money) कहते हैं।
उदाहरण:
₹10 के अंश पर ₹4 प्रति अंश आवंटन राशि माँगी गई।
10,000 अंश × ₹4 = ₹40,000
Allotment की Journal Entries
Share Allotment A/c Dr.
To Share Capital A/c
(आवंटन राशि देय होने पर)
Bank A/c Dr.
To Share Allotment A/c
(आवंटन राशि प्राप्त होने पर)
First Call (प्रथम मांग)
आवेदन एवं आवंटन राशि प्राप्त होने के बाद कंपनी आवश्यकता अनुसार शेष राशि की पहली मांग करती है, जिसे First Call कहा जाता है।
उदाहरण:
₹10 के अंश पर ₹2 प्रथम मांग के रूप में माँगे गए।
10,000 × ₹2 = ₹20,000
First Call की Journal Entries
Share First Call A/c Dr.
To Share Capital A/c
(प्रथम मांग देय होने पर)
Bank A/c Dr.
To Share First Call A/c
(प्रथम मांग राशि प्राप्त होने पर)
Final Call (अंतिम मांग)
जब अंश की शेष अंतिम राशि कंपनी द्वारा माँगी जाती है, तो उसे Final Call कहा जाता है।
यह अंश निर्गमन प्रक्रिया का अंतिम चरण होता है।
उदाहरण:
₹10 के अंश पर शेष ₹1 अंतिम मांग के रूप में माँगा गया।
Final Call की Journal Entries
Share Final Call A/c Dr.
To Share Capital A/c
(अंतिम मांग देय होने पर)
Bank A/c Dr.
To Share Final Call A/c
(अंतिम मांग राशि प्राप्त होने पर)
पूरा उदाहरण (Complete Example)
| विवरण | राशि प्रति अंश |
|---|---|
| Application | ₹3 |
| Allotment | ₹4 |
| First Call | ₹2 |
| Final Call | ₹1 |
| कुल | ₹10 |
यदि कंपनी 10,000 अंश जारी करती है, तो कुल पूंजी होगी:
10,000 × ₹10 = ₹1,00,000
Board Exam Important Questions
- Application Money क्या है?
- Allotment Money का अर्थ लिखिए।
- First Call एवं Final Call में अंतर लिखिए।
- Share Application की Journal Entry लिखिए।
- Share Allotment की Journal Entry लिखिए।
- अंश निर्गमन की प्रक्रिया समझाइए।
Exam Booster Notes
- Application → पहला चरण
- Allotment → दूसरा चरण
- First Call → तीसरा चरण
- Final Call → अंतिम चरण
- Bank A/c हमेशा राशि प्राप्त होने पर Debit होता है।
- Share Capital A/c पूंजी बढ़ने पर Credit होता है।
- Journal Entries बोर्ड परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
अधि-अभिदान (Oversubscription)
जब किसी कंपनी द्वारा जारी किए गए अंशों की संख्या से अधिक अंशों के लिए आवेदन प्राप्त होते हैं, तब इस स्थिति को अधि-अभिदान (Oversubscription) कहा जाता है।
उदाहरण:
कंपनी ने 10,000 अंश जारी किए।
लेकिन आवेदन प्राप्त हुए 15,000 अंशों के लिए।
अतः 5,000 अंशों का Oversubscription हुआ।
Oversubscription क्यों होता है?
- कंपनी की अच्छी प्रतिष्ठा होने पर।
- अधिक लाभांश की संभावना होने पर।
- कंपनी के भविष्य को उज्ज्वल माना जाने पर।
- निवेशकों का विश्वास अधिक होने पर।
Oversubscription की स्थिति में कंपनी के विकल्प
| विकल्प | अर्थ |
|---|---|
| पूर्ण अस्वीकृति | कुछ आवेदनों को पूरी तरह अस्वीकार करना |
| पूर्ण आवंटन | कुछ आवेदकों को पूर्ण अंश देना |
| प्रो-रेटा आवंटन | अनुपात के आधार पर अंश देना |
| मिश्रित पद्धति | उपरोक्त सभी का संयोजन |
प्रो-रेटा आवंटन (Pro-Rata Allotment)
जब सभी आवेदकों को उनके आवेदन के अनुपात में अंश आवंटित किए जाते हैं, तब इसे Pro-Rata Allotment कहा जाता है।
Formula:
आवंटित अंश : आवेदन किए गए अंश
Pro-Rata Example
कंपनी ने 10,000 अंश जारी किए।
आवेदन प्राप्त हुए 12,000 अंशों के लिए।
Pro-Rata Ratio =
10,000 : 12,000
=
5 : 6
यदि किसी व्यक्ति ने 600 अंशों के लिए आवेदन किया है:
600 × 5 / 6
=
500 अंश आवंटित होंगे।
अतिरिक्त आवेदन राशि (Excess Application Money)
Pro-Rata Allotment की स्थिति में आवेदन राशि अधिक प्राप्त हो जाती है।
यह अतिरिक्त राशि कंपनी द्वारा वापस की जा सकती है या आवंटन राशि में समायोजित की जा सकती है।
NCERT Important:
Excess Application Money को सामान्यतः Share Allotment Account में Transfer किया जाता है।
Excess Application Money Calculation
मान लीजिए:
आवेदन राशि = ₹3 प्रति अंश
600 अंशों के लिए आवेदन किया गया।
वास्तव में 500 अंश आवंटित हुए।
प्राप्त आवेदन राशि:
600 × ₹3 = ₹1,800
आवश्यक आवेदन राशि:
500 × ₹3 = ₹1,500
अतिरिक्त आवेदन राशि:
₹1,800 − ₹1,500
= ₹300
यह ₹300 आवंटन राशि में समायोजित कर दिए जाएंगे।
अस्वीकृत आवेदन (Rejected Applications)
कंपनी कुछ आवेदनों को पूरी तरह अस्वीकार भी कर सकती है।
ऐसी स्थिति में आवेदन राशि वापस कर दी जाती है।
Share Application A/c Dr.
To Bank A/c
(आवेदन राशि वापस करने पर)
Oversubscription की Journal Entries
Bank A/c Dr.
To Share Application A/c
(आवेदन राशि प्राप्त होने पर)
Share Application A/c Dr.
To Share Capital A/c
To Share Allotment A/c
(आवेदन राशि का पूंजी एवं आवंटन में समायोजन)
Solved Numerical Question
XYZ Ltd. ने ₹10 वाले 20,000 अंश जारी किए।
आवेदन प्राप्त हुए 24,000 अंशों के लिए।
आवेदन राशि ₹2 प्रति अंश थी।
Pro-Rata आधार पर आवंटन किया गया।
कुल आवेदन राशि:
24,000 × ₹2
= ₹48,000
आवश्यक आवेदन राशि:
20,000 × ₹2
= ₹40,000
अतिरिक्त आवेदन राशि:
₹48,000 − ₹40,000
= ₹8,000
यह ₹8,000 Share Allotment Account में समायोजित किए जाएंगे।
Board Exam Important Questions
- Oversubscription क्या है?
- Pro-Rata Allotment की परिभाषा लिखिए।
- Excess Application Money क्या है?
- Oversubscription की Journal Entries लिखिए।
- Pro-Rata Ratio कैसे निकाला जाता है?
- Rejected Applications का लेखांकन समझाइए।
Exam Booster Notes
- Oversubscription = आवेदन > जारी अंश
- Pro-Rata = अनुपातिक आवंटन
- Excess Application Money = अतिरिक्त आवेदन राशि
- अतिरिक्त राशि प्रायः Allotment में समायोजित की जाती है।
- Rejected Applicants को राशि वापस की जाती है।
- Board Exams में 5 अंक का प्रश्न नियमित रूप से पूछा जाता है।
अंश प्रीमियम (Share Premium)
जब कोई कंपनी अपने अंशों को उनके अंकित मूल्य (Face Value) से अधिक मूल्य पर जारी करती है, तब अतिरिक्त प्राप्त राशि को अंश प्रीमियम (Share Premium) कहा जाता है।
कंपनी की अच्छी प्रतिष्ठा, लाभप्रदता, मजबूत वित्तीय स्थिति तथा निवेशकों के विश्वास के कारण अंश प्रीमियम पर जारी किए जाते हैं।
परिभाषा: अंश के अंकित मूल्य से अधिक प्राप्त राशि को अंश प्रीमियम कहा जाता है।
अंश प्रीमियम की गणना
यदि किसी अंश का अंकित मूल्य ₹10 है और उसे ₹12 में जारी किया जाता है, तो:
निर्गम मूल्य = ₹12
अंकित मूल्य = ₹10
अंश प्रीमियम = ₹12 − ₹10
= ₹2 प्रति अंश
प्रतिभूति प्रीमियम कोष (Securities Premium Reserve)
अंश प्रीमियम से प्राप्त राशि को Securities Premium Account में जमा किया जाता है। यह एक पूंजीगत लाभ (Capital Gain) माना जाता है।
यह राशि कंपनी की सामान्य आय नहीं मानी जाती तथा इसका उपयोग केवल कंपनी अधिनियम में बताए गए विशेष उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
Board Exam Important: Securities Premium Account को पूंजीगत लाभ माना जाता है, राजस्व लाभ नहीं।
Securities Premium का उपयोग
| उपयोग | विवरण |
|---|---|
| Bonus Shares | बोनस अंश जारी करने हेतु |
| Preliminary Expenses | प्रारंभिक व्यय समाप्त करने हेतु |
| Issue Expenses | अंश/ऋणपत्र निर्गमन व्यय लिखने हेतु |
| Premium on Redemption | ऋणपत्र या अधिमानी अंश मोचन प्रीमियम हेतु |
प्रीमियम पर अंश निर्गमन
मान लीजिए कंपनी ने ₹10 अंकित मूल्य वाले 20,000 अंश ₹12 प्रति अंश पर जारी किए।
Face Value = ₹10
Premium = ₹2
Issue Price = ₹12
कंपनी को कुल प्राप्त राशि:
20,000 × ₹12
= ₹2,40,000
Premium Journal Entry (When Premium Becomes Due)
Share Allotment A/c Dr.
To Share Capital A/c
To Securities Premium A/c
(आवंटन पर प्रीमियम देय होने पर)
Premium Journal Entry (When Money Received)
Bank A/c Dr.
To Share Allotment A/c
(आवंटन राशि एवं प्रीमियम प्राप्त होने पर)
Solved Numerical Example 1
ABC Ltd. ने ₹10 वाले 10,000 अंश ₹12 प्रति अंश पर जारी किए।
प्रीमियम ₹2 प्रति अंश आवंटन पर देय है।
कुल Premium:
10,000 × ₹2
= ₹20,000
इस राशि को Securities Premium Account में स्थानांतरित किया जाएगा।
Solved Numerical Example 2
XYZ Ltd. ने ₹100 वाले 5,000 अंश ₹120 प्रति अंश पर जारी किए।
Premium प्रति अंश = ₹20
कुल Premium =
5,000 × ₹20
= ₹1,00,000
Securities Premium Account में ₹1,00,000 जमा किया जाएगा।
Premium at Different Stages
| Stage | Premium Collection |
|---|---|
| Application | कभी-कभी |
| Allotment | अधिकतर यहीं लिया जाता है |
| First Call | कुछ मामलों में |
| Final Call | विशेष परिस्थितियों में |
NCERT एवं बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न
- Share Premium क्या है?
- Securities Premium Account क्या है?
- Premium पर अंश निर्गमन की Journal Entries लिखिए।
- Securities Premium के उपयोग लिखिए।
- Capital Profit एवं Revenue Profit में अंतर लिखिए।
- Premium की गणना कैसे की जाती है?
MCQ Practice
1. Share Premium Account किस प्रकार का खाता है?
(A) Revenue Account
(B) Capital Account
(C) Personal Account
(D) Nominal Account
उत्तर: (B)
2. ₹10 के अंश ₹15 पर जारी किए गए। Premium कितना होगा?
(A) ₹2
(B) ₹3
(C) ₹5
(D) ₹15
उत्तर: (C)
Exam Booster Notes
- Issue Price > Face Value = Premium
- Premium = Issue Price − Face Value
- Securities Premium = Capital Profit
- Board Exam में Journal Entry अवश्य पूछी जाती है।
- Premium प्रायः Allotment पर लिया जाता है।
- Securities Premium का उपयोग सीमित उद्देश्यों के लिए होता है।
Calls in Arrears (बकाया मांग राशि)
जब कोई अंशधारी कंपनी द्वारा मांगी गई राशि को नियत समय पर जमा नहीं करता, तब वह राशि Calls in Arrears कहलाती है।
यह स्थिति Application, Allotment, First Call अथवा Final Call किसी भी चरण में उत्पन्न हो सकती है।
परिभाषा: अंशधारियों द्वारा देय लेकिन अभी तक जमा न की गई मांग राशि को Calls in Arrears कहते हैं।
Calls in Arrears का उदाहरण
ABC Ltd. ने 10,000 अंश जारी किए। Final Call ₹2 प्रति अंश देय था।
एक अंशधारी जिसके पास 500 अंश हैं, उसने Final Call जमा नहीं किया।
Calls in Arrears =
500 × ₹2
= ₹1,000
Calls in Arrears की Journal Entry
Calls in Arrears A/c Dr.
To Share First Call A/c
या
To Share Final Call A/c
(बकाया राशि अलग खाते में स्थानांतरित करने पर)
Calls in Advance (अग्रिम मांग राशि)
जब कोई अंशधारी भविष्य में देय मांग राशि को पहले ही जमा कर देता है, तब उसे Calls in Advance कहा जाता है।
यह कंपनी के लिए देयता (Liability) मानी जाती है क्योंकि भविष्य में उस राशि का समायोजन किया जाना होता है।
महत्वपूर्ण: Calls in Advance को Share Capital नहीं माना जाता।
Calls in Advance का उदाहरण
एक अंशधारी ने Final Call ₹5,000 समय से पहले जमा कर दिया।
कंपनी इस राशि को Calls in Advance Account में दर्ज करेगी।
Calls in Advance की Journal Entry
Bank A/c Dr.
To Calls in Advance A/c
(अग्रिम राशि प्राप्त होने पर)
Calls in Advance A/c Dr.
To Share Call A/c
(भविष्य में राशि समायोजित करने पर)
Calls in Arrears एवं Calls in Advance में अंतर
| Calls in Arrears | Calls in Advance |
|---|---|
| कंपनी को राशि प्राप्त नहीं हुई | कंपनी को राशि पहले ही प्राप्त हो चुकी |
| संपत्ति (Asset) के समान | दायित्व (Liability) के समान |
| अंशधारी देनदार होता है | कंपनी देनदार होती है |
| ब्याज प्राप्त किया जा सकता है | ब्याज देना पड़ सकता है |
Calls in Arrears पर ब्याज
यदि कंपनी के Articles of Association में प्रावधान हो, तो बकाया राशि पर ब्याज लिया जा सकता है।
Table F के अनुसार अधिकतम ब्याज दर = 10% प्रति वर्ष
Interest on Calls in Arrears Journal Entry
Shareholder's A/c Dr.
To Interest on Calls in Arrears A/c
(ब्याज देय होने पर)
Bank A/c Dr.
To Interest on Calls in Arrears A/c
(ब्याज प्राप्त होने पर)
Calls in Advance पर ब्याज
कंपनी को अग्रिम राशि प्राप्त होने पर अंशधारी को ब्याज देना पड़ सकता है।
Table F के अनुसार Calls in Advance पर अधिकतम ब्याज दर = 12% प्रति वर्ष
Interest on Calls in Advance Journal Entry
Interest on Calls in Advance A/c Dr.
To Shareholder's A/c
(ब्याज देय होने पर)
Shareholder's A/c Dr.
To Bank A/c
(ब्याज भुगतान होने पर)
Solved Numerical Example 1
एक अंशधारी ने ₹10,000 की Call Money 6 माह तक जमा नहीं की।
ब्याज दर = 10% प्रति वर्ष
Interest =
₹10,000 × 10 × 6
-------------------
100 × 12
= ₹500
Solved Numerical Example 2
एक अंशधारी ने ₹20,000 Calls in Advance 3 माह पहले जमा किए।
ब्याज दर = 12% प्रति वर्ष
Interest =
₹20,000 × 12 × 3
-------------------
100 × 12
= ₹600
Board Exam Important Questions
- Calls in Arrears क्या है?
- Calls in Advance क्या है?
- दोनों में अंतर लिखिए।
- Interest on Calls in Arrears की Journal Entry लिखिए।
- Interest on Calls in Advance की Journal Entry लिखिए।
- Calls in Advance को Liability क्यों माना जाता है?
Exam Booster Notes
- Calls in Arrears = Unpaid Call Money
- Calls in Advance = Advance Call Money
- Arrears Interest Rate = 10% p.a.
- Advance Interest Rate = 12% p.a.
- Calls in Advance एक Liability है।
- Calls in Arrears Balance Sheet में अलग दर्शाया जाता है।
- बोर्ड परीक्षा में Numerical अवश्य पूछा जाता है।
अंश हरण (Forfeiture of Shares)
जब कोई अंशधारी कंपनी द्वारा मांगी गई राशि (Allotment, First Call या Final Call) का भुगतान निर्धारित समय पर नहीं करता और कंपनी उसके अंशों को रद्द कर देती है, तब इस प्रक्रिया को अंश हरण (Forfeiture of Shares) कहा जाता है।
अंश हरण के बाद अंशधारी अपने अंशों पर स्वामित्व अधिकार खो देता है तथा कंपनी उन अंशों को पुनः जारी कर सकती है।
महत्वपूर्ण: Forfeiture केवल तभी किया जा सकता है जब कंपनी के Articles of Association में इसका प्रावधान हो।
अंश हरण के कारण
- आवंटन राशि जमा न करना।
- प्रथम मांग राशि जमा न करना।
- अंतिम मांग राशि जमा न करना।
- कंपनी द्वारा भेजे गए Notice का पालन न करना।
Forfeiture की सामान्य Journal Entry
Share Capital A/c Dr.
To Share Allotment A/c
To Share Call A/c
To Share Forfeiture A/c
(अंश हरण होने पर)
यहाँ Share Forfeiture Account में वह राशि जमा की जाती है जो अंशधारी पहले ही कंपनी को भुगतान कर चुका होता है।
Solved Example : Forfeiture
एक कंपनी ने ₹10 के 1,000 अंश जारी किए।
आवेदन ₹3, आवंटन ₹4 तथा अंतिम मांग ₹3 थी।
एक अंशधारी जिसके पास 100 अंश थे, उसने अंतिम मांग जमा नहीं की।
प्राप्त राशि:
100 × ₹7 = ₹700
(आवेदन + आवंटन)
अंतिम मांग बकाया:
100 × ₹3 = ₹300
Share Capital A/c Dr. ₹1,000
To Share Final Call A/c ₹300
To Share Forfeiture A/c ₹700
हरित अंशों का पुनः निर्गमन (Reissue of Forfeited Shares)
कंपनी हरण किए गए अंशों को पुनः किसी अन्य व्यक्ति को जारी कर सकती है। इसे Reissue of Forfeited Shares कहते हैं।
पुनः निर्गमन अंकित मूल्य, प्रीमियम या बट्टे (Discount) पर किया जा सकता है।
Reissue at Par (सम मूल्य पर पुनः निर्गमन)
यदि ₹10 का अंश पुनः ₹10 में जारी किया जाए, तो इसे Par पर Reissue कहा जाता है।
Bank A/c Dr.
To Share Capital A/c
Reissue at Premium (प्रीमियम पर पुनः निर्गमन)
यदि ₹10 का अंश ₹12 में पुनः जारी किया जाए:
Bank A/c Dr. ₹12
To Share Capital A/c ₹10
To Securities Premium A/c ₹2
Reissue at Discount (बट्टे पर पुनः निर्गमन)
कंपनी केवल उतने ही बट्टे पर अंश पुनः जारी कर सकती है जितनी राशि Share Forfeiture Account में उपलब्ध है।
₹10 का अंश ₹8 में पुनः जारी किया गया।
Discount = ₹2
Bank A/c Dr. ₹8
Share Forfeiture A/c Dr. ₹2
To Share Capital A/c ₹10
पूंजी आरक्षित (Capital Reserve)
यदि Reissue के बाद Share Forfeiture Account में कुछ राशि बच जाती है, तो उसे Capital Reserve Account में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
Capital Reserve = Share Forfeiture Balance − Discount on Reissue
Capital Reserve Journal Entry
Share Forfeiture A/c Dr.
To Capital Reserve A/c
(शेष राशि Capital Reserve में स्थानांतरित करने पर)
Solved Numerical Example
100 हरण किए गए अंशों पर ₹700 Share Forfeiture Balance था।
उन्हें ₹8 प्रति अंश पर पुनः जारी किया गया।
Discount =
100 × ₹2
= ₹200
Capital Reserve =
₹700 − ₹200
= ₹500
NCERT एवं बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न
- Forfeiture of Shares क्या है?
- अंश हरण की Journal Entry लिखिए।
- Reissue of Forfeited Shares क्या है?
- Capital Reserve कैसे बनता है?
- Discount पर Reissue की सीमा क्या है?
- Forfeiture एवं Reissue की लेखा प्रविष्टियाँ लिखिए।
MCQs Practice
1. Forfeited Shares के Reissue पर बची राशि कहाँ Transfer की जाती है?
(A) General Reserve
(B) Capital Reserve
(C) Revenue Reserve
(D) Securities Premium
उत्तर: (B)
2. Share Forfeiture Account किस प्रकार का खाता है?
(A) Asset
(B) Liability
(C) Capital Profit
(D) Expense
उत्तर: (C)
Exam Booster Notes
- Forfeiture = अंशों का रद्द होना।
- Share Forfeiture Account = Capital Profit।
- Reissue Discount ≤ Share Forfeiture Balance।
- शेष राशि Capital Reserve में जाती है।
- Board Exam में 5 से 8 अंक का प्रश्न नियमित पूछा जाता है।
- Journal Entries अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
NCERT आधारित महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1: अंश (Share) से आप क्या समझते हैं?
कंपनी की कुल पूंजी को छोटे-छोटे समान भागों में विभाजित किया जाता है। इन भागों को अंश (Share) कहा जाता है।
प्रश्न 2: Share Capital क्या है?
अंशों के निर्गमन द्वारा कंपनी को प्राप्त कुल पूंजी को Share Capital कहा जाता है।
प्रश्न 3: Share Premium क्या है?
अंश के अंकित मूल्य से अधिक प्राप्त राशि Share Premium कहलाती है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)
- अंशधारी किसे कहते हैं?
- Oversubscription क्या है?
- Pro-Rata Allotment क्या है?
- Securities Premium क्या है?
- Calls in Arrears क्या है?
- Calls in Advance क्या है?
- Forfeiture का अर्थ लिखिए।
- Capital Reserve क्या है?
- Face Value क्या होती है?
- Issue Price क्या होता है?
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
- समता अंश एवं अधिमानी अंश में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- Share Premium Account के उपयोग लिखिए।
- Oversubscription की स्थिति में कंपनी क्या कदम उठा सकती है?
- Calls in Arrears एवं Calls in Advance में अंतर लिखिए।
- Forfeiture of Shares क्या है?
- Reissue of Forfeited Shares का अर्थ बताइए।
- Capital Reserve कैसे बनता है?
- Application एवं Allotment में अंतर लिखिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
- अंश निर्गमन की सम्पूर्ण प्रक्रिया को उदाहरण सहित समझाइए।
- Oversubscription एवं Pro-Rata Allotment का विस्तृत वर्णन कीजिए।
- Premium पर अंश निर्गमन का लेखांकन समझाइए।
- Calls in Arrears एवं Calls in Advance का लेखांकन कीजिए।
- Forfeiture एवं Reissue of Shares की Journal Entries लिखिए।
- Capital Reserve के निर्माण की प्रक्रिया स्पष्ट कीजिए।
Assertion & Reason Questions
Q1.
Assertion (A): Share Premium एक Capital Profit है।
Reason (R): Share Premium को Revenue Income माना जाता है।
उत्तर: Assertion सही है, Reason गलत है।
Q2.
Assertion (A): Calls in Advance एक Liability है।
Reason (R): कंपनी को भविष्य में यह राशि समायोजित करनी होती है।
उत्तर: दोनों कथन सही हैं तथा Reason सही व्याख्या है।
Q3.
Assertion (A): Oversubscription में आवेदन अंशों से अधिक होते हैं।
Reason (R): सभी निवेशकों को पूर्ण आवंटन मिलता है।
उत्तर: Assertion सही है, Reason गलत है।
MCQ Practice Set (Board + Competitive Exams)
1. Share Premium Account किस प्रकार का खाता है?
(A) Revenue Account
(B) Capital Account
(C) Personal Account
(D) Nominal Account
उत्तर: (B)
2. Calls in Advance क्या है?
(A) बकाया राशि
(B) अग्रिम राशि
(C) ब्याज
(D) लाभांश
उत्तर: (B)
3. Oversubscription कब होता है?
(A) आवेदन कम हों
(B) आवेदन बराबर हों
(C) आवेदन अधिक हों
(D) कोई आवेदन न हो
उत्तर: (C)
4. Share Forfeiture Account किस प्रकार का लाभ है?
(A) Revenue Profit
(B) Capital Profit
(C) Trading Profit
(D) Gross Profit
उत्तर: (B)
5. Pro-Rata Allotment किस स्थिति में किया जाता है?
(A) Undersubscription
(B) Oversubscription
(C) Calls in Arrears
(D) Premium Issue
उत्तर: (B)
Previous Year Board Exam Questions (PYQs)
- Share Premium Account के उपयोग लिखिए।
- Calls in Advance एवं Calls in Arrears में अंतर लिखिए।
- Oversubscription का अर्थ समझाइए।
- Pro-Rata Allotment का उदाहरण दीजिए।
- Forfeiture एवं Reissue की Journal Entries लिखिए।
- Capital Reserve की गणना कैसे की जाती है?
- Premium पर अंश निर्गमन का लेखांकन समझाइए।
- Application एवं Allotment राशि की प्रविष्टियाँ लिखिए।
One Day Revision Notes
- Share = कंपनी की पूंजी का सबसे छोटा भाग।
- Shareholder = अंशधारी।
- Oversubscription = आवेदन > जारी अंश।
- Pro-Rata = अनुपातिक आवंटन।
- Share Premium = Issue Price − Face Value।
- Securities Premium = Capital Profit।
- Calls in Arrears = बकाया राशि।
- Calls in Advance = अग्रिम राशि।
- Forfeiture = अंश हरण।
- Capital Reserve = Forfeiture Profit का शेष भाग।
- Board Exam में Journal Entries अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
Chapter Test (Self Assessment)
- Share Premium की गणना कैसे की जाती है?
- Pro-Rata Ratio कैसे निकाला जाता है?
- Calls in Advance को Liability क्यों माना जाता है?
- Forfeited Shares को Discount पर पुनः निर्गमित करने की सीमा क्या है?
- Capital Reserve कब बनता है?
- Oversubscription की स्थिति में Excess Application Money का क्या किया जाता है?
- Share Capital एवं Share Premium में अंतर लिखिए।
Frequently Asked Questions (FAQ)
1. अंश पूंजी (Share Capital) क्या है?
कंपनी द्वारा अंशों के निर्गमन से प्राप्त कुल पूंजी को अंश पूंजी कहा जाता है।
2. Oversubscription क्या होता है?
जब जारी किए गए अंशों से अधिक अंशों के लिए आवेदन प्राप्त होते हैं, तो उसे Oversubscription कहा जाता है।
3. Pro-Rata Allotment क्या है?
जब अंशों का आवंटन आवेदन के अनुपात में किया जाता है, तो उसे Pro-Rata Allotment कहते हैं।
4. Share Premium क्या होता है?
अंश के अंकित मूल्य से अधिक प्राप्त राशि Share Premium कहलाती है।
5. Calls in Arrears एवं Calls in Advance में क्या अंतर है?
Calls in Arrears बकाया राशि होती है जबकि Calls in Advance भविष्य की अग्रिम जमा राशि होती है।
6. Forfeiture of Shares क्या है?
अंशधारी द्वारा राशि जमा न करने पर कंपनी द्वारा अंशों को रद्द कर देना Forfeiture कहलाता है।
7. Capital Reserve कैसे बनता है?
Forfeited Shares के पुनः निर्गमन के बाद बची हुई Share Forfeiture राशि Capital Reserve में स्थानांतरित की जाती है।
8. Board Exam में सबसे महत्वपूर्ण Topic कौन से हैं?
Oversubscription, Share Premium, Calls in Arrears, Calls in Advance, Forfeiture of Shares एवं Reissue of Shares।
Chapter Summary (अध्याय सारांश)
- कंपनी जनता से पूंजी जुटाने हेतु अंश जारी करती है।
- अंश कंपनी की पूंजी का सबसे छोटा भाग होता है।
- अंश निर्गमन की प्रक्रिया Application, Allotment एवं Calls में होती है।
- Oversubscription होने पर Pro-Rata Allotment किया जा सकता है।
- Face Value से अधिक राशि Share Premium कहलाती है।
- Calls in Arrears बकाया तथा Calls in Advance अग्रिम राशि होती है।
- भुगतान न करने पर अंशों का Forfeiture किया जा सकता है।
- Forfeited Shares को पुनः जारी किया जा सकता है।
- शेष लाभ Capital Reserve में स्थानांतरित किया जाता है।
Board Exam Success Tips
- सभी Journal Entries कम से कम 5 बार लिखकर अभ्यास करें।
- Oversubscription एवं Pro-Rata Questions नियमित हल करें।
- Calls in Arrears एवं Calls in Advance के Interest Questions याद करें।
- Forfeiture एवं Reissue के Numerical बार-बार पूछे जाते हैं।
- NCERT Back Exercise अवश्य हल करें।
- Previous Year Questions की Practice करें।
- Balance Sheet Presentation भी याद रखें।
निष्कर्ष (Conclusion)
अंश पूंजी का लेखांकन कक्षा 12 लेखाशास्त्र का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। यह अध्याय विद्यार्थियों को कंपनी द्वारा पूंजी जुटाने की प्रक्रिया, अंश निर्गमन, प्रीमियम, अधि-अभिदान, मांग राशि, अंश हरण एवं पुनः निर्गमन जैसी व्यावहारिक लेखांकन प्रक्रियाओं को समझने में सहायता करता है।
यदि विद्यार्थी Journal Entries, Numerical Questions तथा NCERT आधारित अवधारणाओं का नियमित अभ्यास करें, तो वे बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर सकते हैं।
Success Formula:
Concept Clarity + Journal Entries + Numerical Practice + PYQs = Excellent Board Marks
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