जीवों में जनन : परिचय
पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीवधारी अपने जीवनकाल में जन्म लेते हैं, वृद्धि करते हैं, परिपक्व होते हैं तथा अंततः मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। यदि जीव केवल जन्म लेकर मर जाएँ और अपनी नई संतति उत्पन्न न करें, तो कुछ समय बाद पृथ्वी से उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इसी कारण जनन (Reproduction) प्रत्येक जीव के लिए अत्यंत आवश्यक जैविक प्रक्रिया है।
जनन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने समान नई संतति उत्पन्न करते हैं। यह प्रक्रिया जीवों की जाति को निरंतर बनाए रखने का कार्य करती है। जनन के माध्यम से ही जीवों की संख्या बढ़ती है तथा उनकी प्रजातियाँ लंबे समय तक पृथ्वी पर बनी रहती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य: जनन जीव के व्यक्तिगत जीवन के लिए आवश्यक नहीं है, लेकिन किसी भी प्रजाति के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
जीवों में जनन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है — अलैंगिक जनन तथा लैंगिक जनन। दोनों प्रकार की प्रक्रियाएँ जीवों की आवश्यकताओं तथा विकास स्तर के अनुसार कार्य करती हैं।
सीखने के उद्देश्य (Learning Objectives)
इस अध्याय का अध्ययन करने के बाद विद्यार्थी निम्नलिखित बिंदुओं को आसानी से समझ पाएंगे:
- जनन का अर्थ एवं महत्व।
- जीवों में जनन की आवश्यकता।
- अलैंगिक एवं लैंगिक जनन की अवधारणा।
- संतति निर्माण की प्रक्रिया।
- जीवों की निरंतरता में जनन की भूमिका।
- विभिन्न प्रकार के जनन के लाभ एवं सीमाएँ।
- जैव विविधता उत्पन्न होने के कारण।
- NCERT एवं बोर्ड परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न।
जीवों के लिए जनन क्यों आवश्यक है?
प्रत्येक जीव का जीवनकाल सीमित होता है। एक निश्चित समय के बाद सभी जीवों की मृत्यु हो जाती है। यदि जीव नई संतति उत्पन्न नहीं करेंगे, तो उनकी जाति धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी। इसलिए जीवों की निरंतरता बनाए रखने के लिए जनन आवश्यक है।
उदाहरण: यदि पृथ्वी पर केवल एक ही आम का पेड़ हो और वह नई संतति उत्पन्न न करे, तो उसकी मृत्यु के बाद आम की प्रजाति समाप्त हो जाएगी।
इसी प्रकार मनुष्य, पशु-पक्षी, सूक्ष्मजीव तथा पौधे सभी अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जनन करते हैं।
जनन के प्रमुख लाभ
| लाभ | विवरण |
|---|---|
| जाति की निरंतरता | जीवों की प्रजाति को समाप्त होने से बचाता है। |
| नई संतति का निर्माण | नए जीवों की उत्पत्ति होती है। |
| जैव विविधता | नई विशेषताएँ विकसित होती हैं। |
| अनुकूलन क्षमता | परिवर्तित वातावरण में जीवों के जीवित रहने की संभावना बढ़ती है। |
| विकास (Evolution) | नई प्रजातियों के निर्माण में सहायता करता है। |
वास्तविक जीवन उदाहरण
किसान खेत में गेहूँ बोता है। एक गेहूँ के पौधे से अनेक बीज प्राप्त होते हैं और उन्हीं बीजों से अगले वर्ष हजारों नए पौधे विकसित हो जाते हैं। यह जनन का सबसे सरल और प्रत्यक्ष उदाहरण है।
इसी प्रकार मनुष्य, गाय, कुत्ता, पक्षी तथा अन्य सभी जीव अपनी संतति उत्पन्न करके अपनी जाति को बनाए रखते हैं।
बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बिंदु
- जनन जीवों की जाति की निरंतरता के लिए आवश्यक है।
- जनन के बिना किसी भी प्रजाति का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।
- जनन दो प्रकार का होता है — अलैंगिक एवं लैंगिक।
- जनन जैव विविधता उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह अध्याय कक्षा 12 जीवविज्ञान की नींव माना जाता है।
Exam Booster Question
प्रश्न: जीवों के लिए जनन क्यों आवश्यक है?
उत्तर: जनन जीवों की प्रजाति की निरंतरता बनाए रखने, नई संतति उत्पन्न करने तथा पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
जब नई संतति के निर्माण में केवल एक जनक (Parent) भाग लेता है और युग्मकों (Gametes) का निर्माण तथा संलयन नहीं होता, तब उस प्रक्रिया को अलैंगिक जनन कहा जाता है।
यह जनन सरल, तीव्र तथा कम समय में अधिक संख्या में संतति उत्पन्न करने वाली प्रक्रिया है। अधिकांश एककोशिकीय जीवों, कवकों तथा कुछ पौधों में यह जनन पाया जाता है।
परिभाषा: वह जनन प्रक्रिया जिसमें केवल एक जनक भाग लेता है तथा निषेचन नहीं होता, अलैंगिक जनन कहलाती है।
अलैंगिक जनन की प्रमुख विशेषताएँ
- केवल एक जनक की आवश्यकता होती है।
- युग्मकों का निर्माण नहीं होता।
- निषेचन नहीं होता।
- संतति आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती है।
- यह प्रक्रिया तीव्र गति से होती है।
- ऊर्जा की आवश्यकता कम होती है।
क्लोन (Clone) क्या होते हैं?
अलैंगिक जनन से उत्पन्न संतति आनुवंशिक रूप से अपने जनक के समान होती है। ऐसे जीवों को क्लोन (Clone) कहा जाता है।
यदि एक अमीबा द्विखंडन द्वारा दो नई कोशिकाएँ बनाता है, तो दोनों नई कोशिकाएँ मूल अमीबा के समान होती हैं। इन्हें क्लोन कहा जाएगा।
महत्वपूर्ण: क्लोन आनुवंशिक रूप से समान जीवों का समूह होता है।
अलैंगिक जनन के प्रकार
| प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| द्विखंडन (Binary Fission) | अमीबा, पैरामीशियम |
| बहुखंडन (Multiple Fission) | प्लाज्मोडियम |
| कली निर्माण (Budding) | यीस्ट, हाइड्रा |
| बीजाणु निर्माण (Sporulation) | राइजोपस |
| कायिक प्रवर्धन | आलू, अदरक, गन्ना |
द्विखंडन (Binary Fission)
इस प्रक्रिया में एक जीव दो समान संततियों में विभाजित हो जाता है।
अमीबा में पहले केन्द्रक विभाजित होता है, उसके बाद कोशिका द्रव्य विभाजित होकर दो नई कोशिकाएँ बना देता है।
कली निर्माण (Budding)
इस प्रक्रिया में जनक शरीर पर एक छोटी कली विकसित होती है जो बढ़कर एक नए जीव में परिवर्तित हो जाती है।
यीस्ट एवं हाइड्रा में कली निर्माण द्वारा अलैंगिक जनन होता है।
बीजाणु निर्माण (Sporulation)
कुछ कवकों में विशेष संरचनाओं के भीतर बीजाणु बनते हैं। अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर ये बीजाणु नए जीव में विकसित हो जाते हैं।
राइजोपस (Bread Mould) बीजाणु निर्माण का प्रमुख उदाहरण है।
कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)
जब पौधों के वानस्पतिक भागों जैसे जड़, तना या पत्ती से नया पौधा विकसित होता है, तो उसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं।
| पौधा | भाग |
|---|---|
| आलू | तना |
| अदरक | तना |
| प्याज | तना |
| ब्रायोफिलम | पत्ती |
| शकरकंद | जड़ |
अलैंगिक जनन के लाभ
- कम समय में अधिक संतति उत्पन्न होती है।
- साथी (Mate) की आवश्यकता नहीं होती।
- ऊर्जा की बचत होती है।
- स्थिर वातावरण में अत्यंत प्रभावी होता है।
- कृषि एवं बागवानी में उपयोगी है।
अलैंगिक जनन की सीमाएँ
- आनुवंशिक विविधता बहुत कम होती है।
- परिवर्तित वातावरण में जीवित रहने की क्षमता कम हो सकती है।
- नई प्रजातियों के निर्माण की संभावना कम होती है।
- रोगों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है।
अलैंगिक एवं लैंगिक जनन में अंतर
| अलैंगिक जनन | लैंगिक जनन |
|---|---|
| एक जनक | दो जनक |
| युग्मक नहीं बनते | युग्मक बनते हैं |
| निषेचन नहीं होता | निषेचन होता है |
| क्लोन बनते हैं | विविधता उत्पन्न होती है |
| तेज़ प्रक्रिया | धीमी प्रक्रिया |
NCERT एवं बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न
- अलैंगिक जनन की परिभाषा लिखिए।
- क्लोन क्या होते हैं?
- द्विखंडन एवं कली निर्माण में अंतर लिखिए।
- कायिक प्रवर्धन क्या है?
- अलैंगिक जनन के लाभ एवं हानियाँ लिखिए।
- राइजोपस में जनन कैसे होता है?
- अमीबा में द्विखंडन की प्रक्रिया समझाइए।
Exam Booster Notes
- क्लोन = आनुवंशिक रूप से समान संतति।
- अमीबा → द्विखंडन।
- यीस्ट एवं हाइड्रा → कली निर्माण।
- राइजोपस → बीजाणु निर्माण।
- आलू एवं अदरक → कायिक प्रवर्धन।
- अलैंगिक जनन में निषेचन नहीं होता।
लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
लैंगिक जनन वह प्रक्रिया है जिसमें नर एवं मादा युग्मकों (Gametes) का निर्माण तथा उनका संलयन (Fusion) होता है। इस संलयन के परिणामस्वरूप युग्मनज (Zygote) बनता है, जिससे नया जीव विकसित होता है।
यह जनन उच्च श्रेणी के पौधों तथा अधिकांश जन्तुओं में पाया जाता है। लैंगिक जनन के कारण संतानों में आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है, जो विकास (Evolution) का आधार मानी जाती है।
परिभाषा: वह जनन प्रक्रिया जिसमें नर एवं मादा युग्मकों का संलयन होता है, लैंगिक जनन कहलाती है।
लैंगिक जनन की प्रमुख विशेषताएँ
- दो युग्मकों का निर्माण होता है।
- निषेचन (Fertilization) होता है।
- युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है।
- नई संतति में आनुवंशिक विविधता पाई जाती है।
- विकास एवं अनुकूलन में सहायता मिलती है।
- यह अपेक्षाकृत धीमी प्रक्रिया है।
लैंगिक जनन का महत्व
लैंगिक जनन जीवों में नई आनुवंशिक विशेषताओं को जन्म देता है। इससे जीव बदलते हुए वातावरण में स्वयं को अनुकूलित कर पाते हैं तथा नई प्रजातियों के विकास की संभावना बढ़ जाती है।
मनुष्यों में प्रत्येक संतान अपने माता-पिता से कुछ विशेषताएँ प्राप्त करती है, लेकिन वह पूर्णतः समान नहीं होती। यही आनुवंशिक विविधता का उदाहरण है।
जीवों का जीवन चक्र (Life Cycle)
प्रत्येक जीव अपने जीवनकाल में विभिन्न अवस्थाओं से गुजरता है। इन अवस्थाओं का क्रम जीवन चक्र कहलाता है।
| अवस्था | विशेषता |
|---|---|
| जन्म | जीवन की शुरुआत |
| वृद्धि | आकार एवं विकास में वृद्धि |
| परिपक्वता | जनन क्षमता का विकास |
| जनन | नई संतति का निर्माण |
| वृद्धावस्था | शारीरिक क्षमता में कमी |
| मृत्यु | जीवन का अंत |
जीवनकाल (Life Span)
किसी जीव के जन्म से लेकर उसकी प्राकृतिक मृत्यु तक की अवधि को जीवनकाल कहते हैं।
| जीव | औसत जीवनकाल |
|---|---|
| तितली | 1 – 2 सप्ताह |
| कुत्ता | 10 – 15 वर्ष |
| हाथी | 60 – 70 वर्ष |
| मनुष्य | 70 – 80 वर्ष |
| बरगद | सैकड़ों वर्ष |
प्रजनन अवस्था (Reproductive Phase)
जीवनकाल की वह अवस्था जिसमें जीव जनन करने में सक्षम होता है, प्रजनन अवस्था कहलाती है।
यही वह समय होता है जब जीव नई संतति उत्पन्न कर सकता है।
पुष्पी पौधों में फूलों का बनना प्रजनन अवस्था का संकेत है।
मनुष्यों में किशोरावस्था के बाद प्रजनन क्षमता विकसित होती है।
किशोरावस्था (Juvenile Phase)
जीवनकाल की प्रारंभिक अवस्था जिसमें जीव जनन करने में सक्षम नहीं होता, किशोरावस्था कहलाती है।
बीज से अंकुरित पौधा प्रारंभ में केवल वृद्धि करता है, फूल नहीं बनाता। यह उसकी किशोरावस्था होती है।
वृद्धावस्था (Senescent Phase)
जीवनकाल की अंतिम अवस्था जिसमें जनन क्षमता धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है, वृद्धावस्था कहलाती है।
इस अवस्था में शारीरिक क्रियाएँ मंद पड़ जाती हैं और अंततः मृत्यु हो जाती है।
अलैंगिक एवं लैंगिक जनन में अंतर
| अलैंगिक जनन | लैंगिक जनन |
|---|---|
| एक जनक भाग लेता है | दो जनक भाग लेते हैं |
| निषेचन नहीं होता | निषेचन होता है |
| क्लोन बनते हैं | विविधता उत्पन्न होती है |
| तेज़ प्रक्रिया | धीमी प्रक्रिया |
| विकास की संभावना कम | विकास की संभावना अधिक |
NCERT Important Concepts
- Life Span (जीवनकाल)
- Juvenile Phase (किशोरावस्था)
- Reproductive Phase (प्रजनन अवस्था)
- Senescent Phase (वृद्धावस्था)
- Sexual Reproduction (लैंगिक जनन)
- Genetic Variation (आनुवंशिक विविधता)
बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न
- लैंगिक जनन की परिभाषा लिखिए।
- जीवनकाल क्या है?
- किशोरावस्था एवं प्रजनन अवस्था में अंतर लिखिए।
- लैंगिक जनन का महत्व बताइए।
- वृद्धावस्था क्या है?
- अलैंगिक एवं लैंगिक जनन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- आनुवंशिक विविधता कैसे उत्पन्न होती है?
Exam Booster Notes
- लैंगिक जनन = युग्मकों का संलयन।
- निषेचन से युग्मनज बनता है।
- जीवनकाल = जन्म से मृत्यु तक की अवधि।
- Juvenile Phase = जनन से पूर्व अवस्था।
- Reproductive Phase = जनन करने की अवस्था।
- Senescent Phase = वृद्धावस्था।
- लैंगिक जनन विकास (Evolution) का आधार है।
पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Flowering Plants)
पुष्पी पादपों (Flowering Plants) में लैंगिक जनन एक अत्यंत महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से नए बीज एवं नई संतति का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया का मुख्य जनन अंग पुष्प (Flower) होता है।
पुष्प को पौधों का जनन अंग कहा जाता है क्योंकि इसी में नर एवं मादा जनन संरचनाएँ उपस्थित रहती हैं। लैंगिक जनन की सम्पूर्ण प्रक्रिया पुष्प के भीतर सम्पन्न होती है।
महत्वपूर्ण तथ्य: पुष्प आवृतबीजी पौधों (Angiosperms) का जनन अंग है।
पुष्प क्या है?
पुष्प वास्तव में एक रूपांतरित प्ररोह (Modified Shoot) है जो जनन का कार्य करता है। पुष्प में उपस्थित विभिन्न भाग मिलकर परागण, निषेचन तथा बीज निर्माण की प्रक्रिया को सम्पन्न करते हैं।
गुलाब, सूर्यमुखी, सरसों, गुड़हल एवं मटर के फूल पुष्पी पादपों के सामान्य उदाहरण हैं।
पुष्प के मुख्य भाग
| पुष्प चक्र | कार्य |
|---|---|
| दलपुंज (Calyx) | कली की सुरक्षा |
| पंखुड़ी दल (Corolla) | परागणकर्ताओं को आकर्षित करना |
| पुंकेसर (Androecium) | नर जनन अंग |
| अंडप (Gynoecium) | मादा जनन अंग |
पुष्प का नामांकित चित्र (Labelled Diagram)
शीर्ष (Stigma)
│
वर्तिका (Style)
│
अंडाशय (Ovary)
│
बीजांड (Ovule)
पुंकेसर (Stamen)
├── परागकोष (Anther)
└── तंतु (Filament)
बोर्ड परीक्षा में इस चित्र को नाम सहित बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पुंकेसर (Androecium) – नर जनन अंग
पुष्प का नर जनन भाग पुंकेसर कहलाता है। प्रत्येक पुंकेसर मुख्यतः दो भागों से मिलकर बना होता है।
| भाग | कार्य |
|---|---|
| परागकोष (Anther) | परागकणों का निर्माण |
| तंतु (Filament) | परागकोष को सहारा देना |
परागकोष के भीतर परागकण (Pollen Grains) बनते हैं, जिनमें नर युग्मक विकसित होते हैं।
परागकण (Pollen Grain)
परागकण सूक्ष्म संरचनाएँ होती हैं जिनमें नर युग्मकोद्भिद (Male Gametophyte) पाया जाता है।
ये परागण प्रक्रिया के दौरान वर्तिकाग्र (Stigma) तक पहुँचते हैं और निषेचन की प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
NCERT Fact: परागकण की बाहरी भित्ति एक्साइन (Exine) तथा भीतरी भित्ति इंटाइन (Intine) कहलाती है।
अंडप (Gynoecium) – मादा जनन अंग
अंडप पुष्प का मादा जनन अंग होता है। यह एक या एक से अधिक अंडपों से मिलकर बना हो सकता है।
| भाग | कार्य |
|---|---|
| वर्तिकाग्र (Stigma) | परागकण ग्रहण करना |
| वर्तिका (Style) | परागनलिका का मार्ग |
| अंडाशय (Ovary) | बीजांडों को धारण करना |
बीजांड (Ovule)
अंडाशय के भीतर स्थित संरचना को बीजांड कहा जाता है। यही आगे चलकर बीज (Seed) में परिवर्तित हो जाती है।
बीजांड के भीतर मादा युग्मकोद्भिद (Female Gametophyte) या भ्रूणकोष (Embryo Sac) पाया जाता है।
एकलिंगी एवं उभयलिंगी पुष्प
| प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| उभयलिंगी पुष्प | नर एवं मादा दोनों अंग उपस्थित | गुड़हल, सरसों |
| एकलिंगी पुष्प | केवल एक प्रकार का जनन अंग | पपीता, खीरा |
NCERT Important Terms
- Androecium = पुंकेसर
- Gynoecium = अंडप
- Anther = परागकोष
- Filament = तंतु
- Stigma = वर्तिकाग्र
- Style = वर्तिका
- Ovary = अंडाशय
- Ovule = बीजांड
- Pollen Grain = परागकण
बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न
- पुष्प को जनन अंग क्यों कहा जाता है?
- पुंकेसर की संरचना समझाइए।
- अंडप की संरचना एवं कार्य लिखिए।
- परागकण क्या है?
- बीजांड की परिभाषा दीजिए।
- उभयलिंगी एवं एकलिंगी पुष्प में अंतर लिखिए।
- पुष्प का नामांकित चित्र बनाइए।
Exam Booster Notes
- पुष्प = पौधे का जनन अंग।
- पुंकेसर = नर जनन अंग।
- अंडप = मादा जनन अंग।
- परागकोष में परागकण बनते हैं।
- अंडाशय में बीजांड पाए जाते हैं।
- बीजांड आगे चलकर बीज बनता है।
- अंडाशय आगे चलकर फल बनता है।
- पुष्प का चित्र बोर्ड परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
लघुबीजाणुधानी (Microsporangium)
पुंकेसर के परागकोष (Anther) के भीतर उपस्थित संरचनाओं को लघुबीजाणुधानी (Microsporangia) कहा जाता है। प्रत्येक परागकोष सामान्यतः चार लघुबीजाणुधानियों से मिलकर बना होता है।
इन्हीं संरचनाओं के भीतर लघुबीजाणु मातृ कोशिकाएँ (Microspore Mother Cells) पाई जाती हैं जो अर्धसूत्री विभाजन द्वारा परागकणों का निर्माण करती हैं।
NCERT तथ्य: परागकोष प्रायः द्विखंडी (Bilobed) होता है तथा प्रत्येक खंड में दो-दो लघुबीजाणुधानियाँ उपस्थित रहती हैं।
परागकोष की आंतरिक संरचना
परागकोष की भित्ति चार प्रमुख परतों से बनी होती है।
| परत | कार्य |
|---|---|
| एपिडर्मिस (Epidermis) | बाहरी सुरक्षा |
| एंडोथीसियम (Endothecium) | परागकोष के फटने में सहायता |
| मध्य परतें (Middle Layers) | पोषण प्रदान करना |
| टेपेटम (Tapetum) | विकसित हो रहे परागकणों को पोषण देना |
Board Important: टेपेटम (Tapetum) बोर्ड परीक्षा में बार-बार पूछा जाने वाला विषय है।
परागकण (Pollen Grain)
परागकण नर युग्मकोद्भिद (Male Gametophyte) का प्रतिनिधित्व करता है। इसका निर्माण लघुबीजाणु से होता है।
| भाग | विशेषता |
|---|---|
| Exine | बाहरी कठोर भित्ति |
| Intine | भीतरी कोमल भित्ति |
| Generative Cell | नर युग्मकों का निर्माण |
| Vegetative Cell | परागनलिका का निर्माण |
गुरुबीजाणुधानी (Megasporangium)
बीजांड (Ovule) को ही गुरुबीजाणुधानी (Megasporangium) कहा जाता है। यह अंडाशय के भीतर स्थित होता है।
गुरुबीजाणुधानी के भीतर गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (Megaspore Mother Cell) पाई जाती है जो अर्धसूत्री विभाजन द्वारा चार गुरुबीजाणुओं का निर्माण करती है।
चार गुरुबीजाणुओं में से सामान्यतः केवल एक कार्यात्मक (Functional) रहता है तथा शेष तीन नष्ट हो जाते हैं।
बीजांड (Ovule) की संरचना
| भाग | कार्य |
|---|---|
| अध्यावरण (Integuments) | सुरक्षा प्रदान करना |
| बीजांडद्वार (Micropyle) | परागनलिका का प्रवेश मार्ग |
| बीजांडासन (Funicle) | बीजांड को अंडाशय से जोड़ना |
| बीजांडकाय (Nucellus) | पोषक ऊतक |
| भ्रूणकोष (Embryo Sac) | मादा युग्मकोद्भिद |
भ्रूणकोष (Embryo Sac)
आवृतबीजी पौधों में भ्रूणकोष (Embryo Sac) मादा युग्मकोद्भिद (Female Gametophyte) होता है।
यह कार्यात्मक गुरुबीजाणु से विकसित होता है तथा निषेचन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
NCERT Important: सामान्य भ्रूणकोष 7 कोशिकीय एवं 8 केंद्रकीय (7-Celled, 8-Nucleate) होता है।
7 कोशिकीय एवं 8 केंद्रकीय भ्रूणकोष
| संरचना | संख्या |
|---|---|
| अंड कोशिका (Egg Cell) | 1 |
| सहायक कोशिकाएँ (Synergids) | 2 |
| प्रतिपाद कोशिकाएँ (Antipodals) | 3 |
| केंद्रीय कोशिका | 1 (दो ध्रुवीय केंद्रकों सहित) |
कुल कोशिकाएँ = 7
कुल केंद्रक = 8
भ्रूणकोष का नामांकित चित्र
प्रतिपाद कोशिका प्रतिपाद कोशिका प्रतिपाद कोशिका
◉ ◉
ध्रुवीय केंद्रक ध्रुवीय केंद्रक
◉ ◉
सहायक कोशिका अंड कोशिका सहायक कोशिका
◉ ◉ ◉
↓
बीजांडद्वार (Micropyle)
मादा युग्मकोद्भिद (Female Gametophyte)
भ्रूणकोष को ही मादा युग्मकोद्भिद कहा जाता है क्योंकि इसी में अंड कोशिका उपस्थित रहती है।
निषेचन के समय नर युग्मक इसी अंड कोशिका से संलयित होकर युग्मनज का निर्माण करता है।
NCERT Important Terms
- Microsporangium = लघुबीजाणुधानी
- Megasporangium = गुरुबीजाणुधानी
- MMC = Microspore Mother Cell
- Megaspore Mother Cell = गुरुबीजाणु मातृ कोशिका
- Tapetum = पोषण प्रदान करने वाली परत
- Embryo Sac = भ्रूणकोष
- Micropyle = बीजांडद्वार
- Nucellus = बीजांडकाय
- Synergids = सहायक कोशिकाएँ
- Antipodals = प्रतिपाद कोशिकाएँ
बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न
- लघुबीजाणुधानी की संरचना समझाइए।
- टेपेटम का कार्य लिखिए।
- गुरुबीजाणुधानी क्या है?
- भ्रूणकोष का नामांकित चित्र बनाइए।
- 7 कोशिकीय 8 केंद्रकीय भ्रूणकोष की व्याख्या कीजिए।
- मादा युग्मकोद्भिद क्या है?
- बीजांड की संरचना एवं कार्य लिखिए।
Exam Booster Notes
- परागकोष में 4 Microsporangia होते हैं।
- Tapetum परागकणों को पोषण देता है।
- बीजांड = Megasporangium।
- Embryo Sac = Female Gametophyte।
- भ्रूणकोष 7 कोशिकीय एवं 8 केंद्रकीय होता है।
- Micropyle से परागनलिका प्रवेश करती है।
- अंड कोशिका निषेचन में भाग लेती है।
परागण (Pollination)
परागण वह प्रक्रिया है जिसमें परागकोष (Anther) से परागकण (Pollen Grains) वर्तिकाग्र (Stigma) तक पहुँचते हैं। यह पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन की प्रारम्भिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
निषेचन तभी संभव होता है जब परागकण सफलतापूर्वक वर्तिकाग्र तक पहुँच जाएँ। इसलिए परागण को लैंगिक जनन का प्रथम चरण माना जाता है।
परिभाषा: परागकोष से वर्तिकाग्र तक परागकणों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को परागण कहते हैं।
परागण के प्रकार
| प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| स्वपरागण (Self Pollination) | उसी पुष्प या उसी पौधे के पुष्प पर परागण |
| परपरागण (Cross Pollination) | एक पौधे से दूसरे पौधे के पुष्प पर परागण |
स्वपरागण (Self Pollination)
जब परागकण उसी पुष्प या उसी पौधे के किसी अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो इसे स्वपरागण कहते हैं।
मटर (Pea), गेहूँ तथा धान में स्वपरागण सामान्य रूप से पाया जाता है।
स्वपरागण के लाभ
- परागकणों की कम बर्बादी होती है।
- शुद्ध वंश (Pure Line) बनी रहती है।
- परागणकर्ता की आवश्यकता नहीं होती।
- सफल निषेचन की संभावना अधिक होती है।
स्वपरागण की सीमाएँ
- आनुवंशिक विविधता कम होती है।
- नई विशेषताओं का विकास सीमित होता है।
- अनुकूलन क्षमता कम हो सकती है।
परपरागण (Cross Pollination)
जब एक पौधे के पुष्प से परागकण उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो इसे परपरागण कहते हैं।
पपीता, नारियल, मक्का तथा सूर्यमुखी में परपरागण सामान्य रूप से पाया जाता है।
परपरागण के लाभ
- आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है।
- नई विशेषताएँ विकसित होती हैं।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- विकास (Evolution) को बढ़ावा मिलता है।
स्वपरागण एवं परपरागण में अंतर
| स्वपरागण | परपरागण |
|---|---|
| एक ही पौधे में होता है | दो पौधों के बीच होता है |
| विविधता कम | विविधता अधिक |
| परागकण कम नष्ट होते हैं | परागकण अधिक नष्ट हो सकते हैं |
| शुद्ध वंश बनी रहती है | नई विशेषताएँ विकसित होती हैं |
उनमील पुष्प (Chasmogamous Flowers)
वे पुष्प जो पूर्ण रूप से खुलते हैं तथा जिनमें परागण सामान्य रूप से होता है, उनमील पुष्प कहलाते हैं।
गुलाब, गुड़हल तथा सरसों के पुष्प उनमील पुष्पों के उदाहरण हैं।
अनुनमील पुष्प (Cleistogamous Flowers)
वे पुष्प जो कभी नहीं खुलते और बंद अवस्था में ही स्वपरागण कर लेते हैं, अनुनमील पुष्प कहलाते हैं।
अनुनमील पुष्पों में स्वपरागण की संभावना 100% होती है।
वायोला (Viola), ऑक्सेलिस (Oxalis) तथा कॉमेलिना (Commelina) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
स्व-अयोग्यता (Self Incompatibility)
कुछ पौधों में स्वपरागण होने के बाद भी निषेचन नहीं हो पाता। यह स्थिति स्व-अयोग्यता कहलाती है।
यह एक आनुवंशिक प्रक्रिया है जो परपरागण को बढ़ावा देती है।
NCERT Fact: Self Incompatibility आनुवंशिक विविधता बनाए रखने में सहायता करती है।
विपुंसन (Emasculation)
कृत्रिम संकरण (Artificial Hybridization) के दौरान पुष्प के अपरिपक्व परागकोषों को हटाने की प्रक्रिया को विपुंसन कहते हैं।
इस प्रक्रिया द्वारा अवांछित स्वपरागण को रोका जाता है।
बैगिंग तकनीक (Bagging Technique)
विपुंसन के बाद पुष्प को विशेष कागज़ या थैली से ढक दिया जाता है। इस प्रक्रिया को बैगिंग कहते हैं।
बैगिंग द्वारा बाहरी परागकणों से सुरक्षा प्रदान की जाती है।
यह तकनीक पादप प्रजनन कार्यक्रमों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
कृत्रिम संकरण (Artificial Hybridization)
जब वैज्ञानिक या कृषिविज्ञानी इच्छित गुणों वाले दो पौधों का नियंत्रित परागण करवाते हैं, तो इसे कृत्रिम संकरण कहा जाता है।
नई एवं उच्च उत्पादक किस्मों के विकास के लिए यह तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण है।
परपरागण के वाहक (Agents of Pollination)
| वाहक | उदाहरण |
|---|---|
| वायु (Wind) | मक्का, घास |
| जल (Water) | वैलिसनेरिया |
| कीट (Insects) | सूर्यमुखी, सरसों |
| पक्षी (Birds) | कुछ उष्णकटिबंधीय पौधे |
| चमगादड़ (Bats) | रात्रिचर पौधे |
NCERT एवं बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न
- परागण की परिभाषा लिखिए।
- स्वपरागण एवं परपरागण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- उनमील एवं अनुनमील पुष्प क्या हैं?
- स्व-अयोग्यता क्या है?
- विपुंसन तथा बैगिंग क्या है?
- कृत्रिम संकरण का महत्व लिखिए।
- परागण के विभिन्न वाहकों का वर्णन कीजिए।
Exam Booster Notes
- Pollination = Anther से Stigma तक परागकणों का स्थानांतरण।
- Self Pollination = उसी पौधे में परागण।
- Cross Pollination = दो पौधों के बीच परागण।
- Cleistogamous Flowers = सदैव बंद पुष्प।
- Chasmogamous Flowers = खुले पुष्प।
- Emasculation = परागकोष हटाना।
- Bagging = पुष्प को ढकना।
- Self Incompatibility परपरागण को बढ़ावा देती है।
द्विनिषेचन (Double Fertilization)
आवृतबीजी पौधों की सबसे महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट विशेषता द्विनिषेचन (Double Fertilization) है। यह प्रक्रिया केवल पुष्पी पादपों में पाई जाती है और बोर्ड परीक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
परागनलिका के माध्यम से दो नर युग्मक भ्रूणकोष में प्रवेश करते हैं। इनमें से एक नर युग्मक अंड कोशिका से संलयित होता है जबकि दूसरा केंद्रीय कोशिका के ध्रुवीय केंद्रकों से संलयित होता है।
NCERT Important: Double Fertilization शब्द की खोज एस. जी. नवाशिन (S.G. Nawaschin) ने की थी।
द्विनिषेचन के चरण
| प्रक्रिया | परिणाम |
|---|---|
| निषेचन (Syngamy) | युग्मनज (Zygote) बनता है |
| त्रिसंलयन (Triple Fusion) | प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक बनता है |
इन दोनों प्रक्रियाओं को मिलाकर द्विनिषेचन कहा जाता है।
निषेचन (Syngamy)
जब एक नर युग्मक अंड कोशिका (Egg Cell) से संलयित होता है तो द्विगुणित युग्मनज (2n Zygote) का निर्माण होता है।
नर युग्मक (n) + अंड कोशिका (n)
↓
युग्मनज (2n)
यही युग्मनज आगे चलकर भ्रूण (Embryo) में विकसित होता है।
त्रिसंलयन (Triple Fusion)
दूसरा नर युग्मक भ्रूणकोष की केंद्रीय कोशिका में उपस्थित दो ध्रुवीय केंद्रकों से संलयित होता है।
नर युग्मक (n)
+
दो ध्रुवीय केंद्रक (n+n)
↓
प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (3n)
इस प्रक्रिया को त्रिसंलयन (Triple Fusion) कहा जाता है।
भ्रूणपोष (Endosperm)
त्रिसंलयन के परिणामस्वरूप बनने वाला प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक विभाजित होकर भ्रूणपोष (Endosperm) का निर्माण करता है।
भ्रूणपोष विकसित हो रहे भ्रूण को भोजन प्रदान करता है।
नारियल का पानी तथा नारियल की सफेद गिरी भ्रूणपोष का उदाहरण है।
भ्रूण (Embryo) का निर्माण
निषेचन से बना युग्मनज लगातार विभाजित होकर भ्रूण (Embryo) का निर्माण करता है।
भ्रूण ही आगे चलकर नए पौधे में विकसित होता है।
| संरचना | कार्य |
|---|---|
| बीजपत्र (Cotyledons) | भोजन संग्रहण |
| प्रांकुर (Plumule) | तना बनाता है |
| मूलांकुर (Radicle) | जड़ बनाता है |
बीज का निर्माण (Seed Formation)
निषेचन के बाद बीजांड (Ovule) बीज में परिवर्तित हो जाता है।
| निषेचन से पहले | निषेचन के बाद |
|---|---|
| बीजांड (Ovule) | बीज (Seed) |
| अंडाशय (Ovary) | फल (Fruit) |
| अध्यावरण (Integument) | बीजचोल (Seed Coat) |
फल का निर्माण (Fruit Formation)
निषेचन के बाद अंडाशय विकसित होकर फल (Fruit) बन जाता है।
आम, सेब, अमरूद, टमाटर एवं मटर के फल अंडाशय से विकसित होते हैं।
अपफलन (Parthenocarpy)
जब निषेचन के बिना फल का निर्माण हो जाता है, तो उसे अपफलन (Parthenocarpy) कहते हैं।
ऐसे फलों में सामान्यतः बीज नहीं पाए जाते।
केला, अनानास एवं कुछ संतरे अपफलित फलों के उदाहरण हैं।
महत्वपूर्ण NCERT Questions
- द्विनिषेचन क्या है?
- त्रिसंलयन की प्रक्रिया समझाइए।
- भ्रूणपोष क्या है?
- बीज निर्माण की प्रक्रिया समझाइए।
- अंडाशय फल में कैसे परिवर्तित होता है?
- अपफलन क्या है?
- भ्रूण एवं भ्रूणपोष में अंतर लिखिए।
MCQs (बहुविकल्पीय प्रश्न)
1. Double Fertilization किसमें पाया जाता है?
(A) कवक (B) जिम्नोस्पर्म (C) आवृतबीजी (D) शैवाल
उत्तर: (C) आवृतबीजी
2. Triple Fusion के बाद क्या बनता है?
(A) भ्रूण (B) युग्मनज (C) भ्रूणपोष केंद्रक (D) बीज
उत्तर: (C)
3. भ्रूणपोष का मुख्य कार्य क्या है?
(A) जनन (B) भोजन संग्रहण (C) परागण (D) बीज निर्माण
उत्तर: (B)
4. बीजांड किसमें परिवर्तित होता है?
(A) फल (B) बीज (C) जड़ (D) तना
उत्तर: (B)
5. निषेचन के बाद अंडाशय क्या बनता है?
(A) बीज (B) भ्रूण (C) फल (D) बीजपत्र
उत्तर: (C)
Previous Year Questions (PYQs)
- द्विनिषेचन को परिभाषित कीजिए।
- त्रिसंलयन एवं निषेचन में अंतर लिखिए।
- भ्रूणपोष के कार्य लिखिए।
- बीज निर्माण की प्रक्रिया समझाइए।
- अपफलन क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
- फल निर्माण की प्रक्रिया लिखिए।
Exam Booster Revision Notes
- Double Fertilization केवल Angiosperms में पाया जाता है।
- Syngamy → Zygote (2n)
- Triple Fusion → PEN (3n)
- Endosperm भ्रूण को भोजन देता है।
- Ovule → Seed
- Ovary → Fruit
- Integument → Seed Coat
- Parthenocarpy = बिना निषेचन के फल निर्माण।
- Nawaschin = Double Fertilization की खोज।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1. जनन (Reproduction) क्या है?
वह जैविक प्रक्रिया जिसके द्वारा जीव अपने समान नई संतति उत्पन्न करते हैं, जनन कहलाती है।
Q2. अलैंगिक एवं लैंगिक जनन में मुख्य अंतर क्या है?
अलैंगिक जनन में एक जनक भाग लेता है जबकि लैंगिक जनन में नर एवं मादा युग्मकों का संलयन होता है।
Q3. क्लोन (Clone) क्या होते हैं?
अलैंगिक जनन से उत्पन्न आनुवंशिक रूप से समान संततियों को क्लोन कहते हैं।
Q4. Double Fertilization क्या है?
आवृतबीजी पौधों में निषेचन एवं त्रिसंलयन की संयुक्त प्रक्रिया को द्विनिषेचन कहा जाता है।
Q5. Embryo Sac क्या है?
भ्रूणकोष (Embryo Sac) मादा युग्मकोद्भिद होता है जो बीजांड के भीतर पाया जाता है।
Q6. Triple Fusion क्या है?
एक नर युग्मक तथा दो ध्रुवीय केंद्रकों के संलयन को त्रिसंलयन कहते हैं।
Q7. Self Pollination क्या है?
उसी पौधे या उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर परागकणों के स्थानांतरण को स्वपरागण कहते हैं।
Q8. Board Exam के लिए सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक कौन से हैं?
- Double Fertilization
- Embryo Sac
- Pollination
- Microsporangium
- Megasporangium
- Artificial Hybridization
- Parthenocarpy
NCERT Chapter Quick Summary
- जनन जीवों की प्रजाति की निरंतरता बनाए रखता है।
- जनन दो प्रकार का होता है — अलैंगिक एवं लैंगिक।
- अलैंगिक जनन में क्लोन बनते हैं।
- लैंगिक जनन आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करता है।
- पुष्प आवृतबीजी पौधों का जनन अंग है।
- पुंकेसर नर तथा अंडप मादा जनन अंग है।
- Embryo Sac मादा युग्मकोद्भिद होता है।
- परागण के बाद निषेचन होता है।
- Double Fertilization केवल Angiosperms में पाया जाता है।
- Ovule → Seed तथा Ovary → Fruit बनता है।
Memory Tricks (याद रखने की ट्रिक्स)
Clone = Same Copy
क्लोन हमेशा जनक के समान होते हैं।
Double Fertilization = 2 Fusion
Syngamy + Triple Fusion
Ovule → Seed
Ovary → Fruit
Embryo Sac = 7 Cells + 8 Nuclei
Board Exam Final Revision Points
- 7 कोशिकीय 8 केंद्रकीय भ्रूणकोष अवश्य याद करें।
- Double Fertilization की प्रक्रिया Diagram सहित तैयार करें।
- Microsporangium एवं Megasporangium के चित्र बनाना सीखें।
- Pollination के सभी प्रकार याद रखें।
- Self Incompatibility तथा Bagging बार-बार पूछे जाते हैं।
- Parthenocarpy के उदाहरण याद रखें।
- NCERT Diagram Practice अवश्य करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
जीवों में जनन तथा पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन जीवविज्ञान के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक हैं। यह अध्याय विद्यार्थियों को जीवन की निरंतरता, आनुवंशिक विविधता, परागण, निषेचन तथा बीज निर्माण जैसी मूलभूत जैविक प्रक्रियाओं को समझने में सहायता करता है।
यदि विद्यार्थी NCERT के सभी चित्रों, परिभाषाओं, प्रक्रियाओं तथा महत्वपूर्ण प्रश्नों का नियमित अभ्यास करें, तो बोर्ड परीक्षा तथा NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर सकते हैं।
Final Success Formula:
NCERT Reading + Diagram Practice + PYQ Revision + MCQ Practice = Excellent Marks
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